आलमी तब्लीगी इज्तिमा-2019 : इबादत में बने अदावत के हालात!

भोपाल। पहली बार चार दिन के लिए आयोजित किया गया 72वां आलमी तब्लीगी इज्तिमा जहां कई नए कामों और व्यवस्थाओं के लिए रिकार्ड में नाम दर्ज कराने जा रहा है, वहीं इस आयोजन के दौरान हुए दो बड़े फैसले, इस मजहबी इज्तिमा के बहाने अपने मकसदों के निशाने लगाने की कवायदें जैसे नजर आ रहे हँ। एक तरफ क्लीन, ग्रीन और जीरो वेस्ट मामले को लेकर आलमी तब्लीगी इज्तिमा का नाम गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकार्ड में दर्ज होने के आसार बने हैं, वहीं इस दौरान फूड जोन को पूरी तरह शाकाहारी किया जाना आने वाली जमातों को अखर गया है। साथ ही कम पड़ती जगह और हर साल किए जाने वाले बड़े खर्चों के जवाब मेंं स्थायी इज्तिमागाह की सरकारी ख्वाहिश को नकार दिया जाने के फैसले को भी कई सियासतों से घिरा हुआ माना जा रहा है। 

एक फैसला, जिससे बनेगा रिकार्ड

पॉलिथिन और प्लास्टिक मुक्त इज्तिमागाह की कवायद पिछले कई सालों से जारी है। इस दौरान तंबाकू उत्पादों के उपयोग पर पाबंदी से भी सामाजिक बुराईयों के खिलाफ एक पैगाम देने की कोशिश यहां की जाती रही है। इस साल इसमें एक कदम आगे बढ़ाते हुए जीरो वेस्ट की धारणा पर काम शुरू किया गया। जिसके लिए बड़ी तादाद में वालेंटियर्स और मशीनों का इंतजाम कर इज्तिमागाह से निकलने वाले कचरे को बायो गैस में तब्दील करने की कवायद की गई। यहां लगाए गए प्लांट के जरिये कचरे से हर 16 घंटे में 8 टन कूकिंग गैस और खाद तैयार की गई। इंतजामिया कमेटी और नगर निगम के इस संयुक्त प्रयास को लेकर गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकार्ड और लिम्का बुक ऑफ वल्र्ड रिकार्ड में दर्ज कराने का दावा किया गया है। दोनों एजेंसियों की टीमें यहां मौजूद हैं और अपने सर्वेक्षण का नतीजा जल्दी ही जारी करने वाली हैं।

इन दो फैसलों से फैली नाराजगी

पहला फैसला : इज्तिमा की शुरूआत से पहले इस बात की सुगबुगाहट शुरू कर दी गई थी कि इस बार इज्तिमागाह पर लगने वाले फूड जोन में नॉनवेज खाने की उपलब्धता नहीं होगी। इंतजामिया कमेटी के इस फैसले की खबर जल्दी ही सारे एतराफ में फैली और इसको लेकर आपत्तियां सुनाई देने लगीं। जिसके बाद अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री आरिफ अकील ने अधिकृत सरकारी प्रेसनोट जारी कर इस बात का ऐलान किया कि नॉनवेज पाबंदी की अफवाह गलत है और इज्तिमागाह में पहले की तरह जमाती अपनी पसंद का खाना खा सकेंगे। लेकिन यहां लगाए गए करीब 70 फूड जोन में  से किसी एक पर भी नॉनवेज खाना इज्तिमा के दौरान नहीं मिल पाया। हालात यहां तक बने कि इज्तिमागाह की राह में लगने वाले फूड स्टॉल तक भी नॉनवेज बिक्री प्रतिबंधित कर दिया गया। मंत्री के आदेशों के खिलाफ होने वाले इस काम को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं कि इंतजामिया कमेटी किस दबाव में इस तरह के फैसले को लेने पर मजबूर हो गई कि उसे हलाल खाने के लिए भी पाबंदी लगाने की नौबत आ गई। लोगों का कहना है कि जो खाना हलाल है, उसके लिए पाबंदी आयद कर दी गई, जबकि शरई लिहाज से पानी की तिजारत को गैर मुनासिब करार दिया गया है, उसका धड़ल्ले से कारोबार इज्तिमागाह पर हो रहा है। इंतजामिया कमेटी के नॉनवेज प्रतिबंध को लेकर इस बात की कहानियां भी सामने आ रही हैं कि एनजीटी के एक आदेश के पालन न कर पाने के चलते नगर निगम और जिला प्रशासन अपनी नाक बचाने के लिए कमेटी से गुजारिश करता रहा है, जिसके चलते इस फैसले को ओढ़ लिया गया। हालांकि नगर निगम इस बात से साफ इंकार करता नजर आ रहा है कि उसने किसी बात के लिए इंतजामिया को कोई दबाव डाला है। 

दूसरा फैसला : इज्तिमा शुरू होने के दो दिन पहले राजस्व मंत्री डॉ. गोविंद सिंह व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए इज्तिमागाह पहुंचे थे। इस दौरान उनके सामने स्थायी इज्तिमागाह बनाने का प्रस्ताव रखा गया। आनन-फानन में राजस्व मंत्री ने इज्तिमागाह के लिए अचारपुरा में करीब 150 एकड़ जमीन स्थायी इज्तिमागाह निर्माण के लिए देने की अनुमति दे दी। ताबड़तोड़ जिला प्रशासन के अधिकारियों ने इस बात के लिए सर्वे करना भी शुरू कर दिया और जल्दी ही अपनी रिपोर्ट पेश करने का आश्वासन दिया। इस बीच इस बात पर भी सहमति बनी थी कि इज्तिमागाह के लिए जरूरत की करीब 150 एकड़ बाकी की जमीन इंतजामिया कमेटी खुद आसपास के किसानों या भूमि स्वामियों से खरीद कर काम पूरा करेगी। इस ऐलान के बाद ही शुरू हुई श्रेय की लड़ाई का हश्र दो ही दिन बाद उस समय धराशायी होने के रूप में आया, जब इज्तिमागाह पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने ऐलान किया कि हजरत जी की ख्वाहिश है कि इज्तिमागाह की जगह में तब्दीली न की जाए। दिग्विजय सिंह के इस फैसले को अगले दिन अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री आरिफ अकील ने भी दोहराते हुए कह दिया कि जैसा बुजुर्ग कहेंगे, वैसी व्यवस्थाएं कर दी जाएंगी। 

कौम के फैसलों के लिए हो सबकी रजामंदी : काजी युसुफ जई

मुस्लिम समाज मप्र के संयोजक काजी नूर उल्लाह युसुफ जई ने पूरी कौम के लिए होने वाले फैसलों में चंद लोगों की ख्वाहिश और रजामंदी पर एतराज जताया है। उनका कहना है कि कौम के लाखों लोगों की अकीदत से जुड़े किसी भी फैसले के लिए एक सार्वजनिक मशविरा और राय होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की एक मंशा को पूरा करने के लिए इंतजामिया कमेटी ने नॉनवेज प्रतिबंधित करने का बड़ा फैसला खुद ही ले लिया। इससे आने वाले दिनों में कई तरह की परेशानियां और वाजिब-गैरवाजिब फैसले लाद दिए जाने के हालात बनने की गुंजाइश से इंकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि कोई भी सरकार, शासन या प्रशासन किसी भी कौम के लिए खाने-पीने, उसके जीने और रहने  के तौर तरीकों को बदलने या उसमें किसी तरह की रोक लगाने का अधिकार नहीं रखती है। काजी युसुफजई ने लाखों लोगों की मौजूदगी वाले इस बड़े आलमी समागम की कम होती जगह और लोगों को होने वाली परेशानियों का हवाला देते हुए कहा कि जिस तरह सभी धर्मों के बड़े आयोजन के लिए स्थायी जगह और इंतजाम सरकारों ने किए हैं, वैसा ही कोई इंतजाम इज्तिमा के लिए भी कर दिया जाता है तो किसी को क्या आपत्ति हो सकती है। उन्होंने कहा कि आपसी समान्जस्य न होने के चलते भोपाल पहले भी हज हाउस निर्माण को लेकर बड़ा नुकसान उठा चुका है। ऐसी आपसी खींचतान का मामला चलता रहा तो आने वाले सप्ताह में उज्जैन में सरकार द्वारा आयोजित किए जा रहे धर्मस्व कैबिनेट के दौरान मुस्लिम समाज का दावा न सिर्फ कमजोर पड़ेगा, बल्कि खारिज भी हो सकता है। उन्होंंने कहा कि मौजूदा स्थान पर इज्तिमा आयोजित करते रहने के पीछे कई लोगों के मकसद और व्यक्तिगत मफाद जुड़े हुए हैं, इसी वजह से वे इस आयोजन को दूसरे स्थान पर शिफ्ट होने देने में अडंगे लगा रहे हैं। काजी नूरउल्लाह ने कहा कि इन दोनों मामलों को लेकर जल्दी मुस्लिम समाज मप्र का एक प्रतिनिधि मंडल मुख्यमंत्री से मुलाकात कर वस्तुस्थिति से अवगत कराएगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो उनके संगठन के पदाधिकारी 7 दिसंबर को उज्जैन में होने वाले धर्मस्व कैबिनेट में पहुंचकर भी अपनी बात रखेगा और इज्तिमागाह के लिए मुनासिब जगह का आवंटन करने की मांग कैबिनेट के सामने रखेगा।