उपचुनाव से पहले कांग्रेस में बिगड़ा तालमेल, ‘सेल्फ गोल’ कर रहे नेता

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट
उपचुनाव (By Election) से पहले कांग्रेस (Congress) के अंदरखाने अपने ही अपनों पर निशाना साध रहे, कटघरे में खड़ा कर रहे हैं| यह स्थिति तब है, जब सरकार जाने के बाद लगातार पार्टी छोड़ विधायक भाजपा का दामन थाम रहे हैं| इस बिगड़े तालमेल पर भाजपा को कांग्रेस पर निशाना साधने का मौक़ा मिल रहा है| अब पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा (Sajjan Singh Verma) ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के भाई विधायक लक्ष्मण सिंह (Lakshman Singh) पर हमला बोला है| उन्होंने कहा कलियुग में इस तरह के लोग भी पैदा हो रहे हैं, जो अपने पुरखों और वरिष्ठों पर सवाल खड़े कर रहे हैं|

दरअसल, कांग्रेस विधायक लक्ष्मण सिंह ने राम मंदिर भूमिपूजन के बाद कांग्रेस की रामभक्ति पर अपनी पार्टी के सीनियर नेताओं पर निशाना साधा था। अब लक्ष्मण सिंह पर पलटवार करते हुए सज्जन सिंह वर्मा ने कहा- भगवान राम और लक्ष्मण त्रेता युग में पैदा हुए थे लेकिन अब कलयुग है। कलयुग में उस तरह के लोग भी पैदा हो रहे हैं जो अपने पुरखों में और अपने वशिष्ठों पर प्रश्नचिन्ह लगा रहे हैं। मेरा तो अनुरोध है कि दिग्विजय सिंह कहां तक पढ़े हैं और लक्ष्मण सिंह कहां तक पढ़ें हैं ये खोजबीन कर लें तो पता चल जाएगा कि कौन बुद्धिमान हैं और कौन कमजोर बुद्धिमान है।

लक्ष्मण ने कहा था- जय श्रीराम कहने से वोट नहीं बढ़ेगा
कांग्रेस विधायक लक्ष्मण सिंह का कहना है कि कांग्रेस को सही मुद्दों को उठाना चाहिए, जय श्री राम और शुद्धिकरण करने से कुछ नहीं होगा| ऐसा करने से कांग्रेस का वोट नहीं बढ़ेगा, बल्कि बहुजन समाज पार्टी का वोट जरूर बढ़ेगा| हमें जनता से जुड़े मुद्दों को उठाना चाहिए| बहुत से ऐसे मुद्दे हैं जिन्हे हमें उठाना चाहिए, नहीं तो बसपा को लाभ मिलना निश्चित है|

अपनी ही पार्टी को दिखाते रहे हैं आइना
यह पहला मौका नहीं है जब लक्ष्मण सिंह ने पार्टी लाइन से अलग जाकर बात कही हो। इससे पहले भी वे बेबाकी से अपनी ही पार्टी पर सवाल खड़े करते हुए पार्टी को आइना दिखा चुके हैं| हालही में उन्होंने राम के नाम पर राजनीति बंद करने की नसीहत दी थी| इससे पहले भी उन्होंने अपने एक ट्वीट में कहा था, हम कांग्रेस के साथी भाजपा, संघ की विचारधारा को निरन्तर कोसते हैं, मैं भी उनकी विचार धारा से सहमत नहीं हूं, परंतु कांग्रेस की विचार धारा कहां लुप्त हो गई कि चुनाव में हमें “दुष्ट’ तांत्रिक बाबाओं की मदद लेनी पड़ रही है|