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भोपाल| विधानसभा चुनाव में जीत के बाद लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुटी कांग्रेस उम्मीदवार चयन की कवायद में जुटी हुई है|  कांग्रेस की जिन 15 सीटों की तैयारी बैठकें हुईं हैं, उनके माध्यम से पार्टी ने एक और सर्वे करा लिया है। क्षेत्र के चुनिंदा नेताओं की रायशुमारी और पर्चियों में दावेदारों के नाम लेकर यह सर्वे कराया गया है। इसमें आए नामों को मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने पास रखा है। वहीं प्रदेश के बड़े शहरों में कांग्रेस के लिए दमदार प्रत्याशी का आभाव है| क्यूंकि इन शहरों में कांग्रेस लम्बे समय से हार चख रख रही है| लेकिन हाल ही में मिली जीत के बाद कांग्रेस का हौसला बढ़ा है और इसी माहौल को भुनाते हुए पार्टी बीजेपी के मजबूत गढ़ वाली सीटों पर भी ऐसे दमदार प्रत्याशी की खोज में है जो कड़ी टक्कर दे सके| 

 प्रदेश कांग्रेस इन सीटों को लेकर हाईकमान के भरोसे दिखाई दे रहा है। यहां से पार्टी की बड़े नेताओं को उतारने की तैयारी है, जिसके लिए कुछ नाम चर्चा में भी हैं। हालांकि अभी तक पार्टी ने कोई स्पष्ट नीति का खुलासा नहीं किया है। जिताऊ चेहरे को ही मैदान में उतारा जाएगा| किसी भी सीट पर वाक ओवर देने का विचार नहीं है| जिसके चलते कई चुनाव बाद 2009 में कांग्रेस को 12 सीटें मिली थीं, लेकिन तब भी भोपाल, इंदौर, जबलपुर व ग्वालियर में कांग्रेस प्रत्याशी नहीं जीत सके थे। इसके पहले अविभाजित मध्य प्रदेश के समय 1991में कांग्रेस को 12 सीटें मिली थीं। इस बार पार्टी ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतना चाहती है जिसके हिसाब से तैयारी भी की जा रही है| 

भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर लोकसभा सीटों पर पर पार्टी चौंकाने वाला फैसला कर सकती है|  पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय स���ंह को लेकर चर्चा है कि उन्हें पार्टी लोकसभा चुनाव में उतार सकती है। उन्हें इंदौर या भोपाल सीट पर चुनाव लड़वाने की मांग कुछ नेताओं ने की भी है। वे भी पत्रकारों से बातचीत में अपने चुनाव लड़ने को लेकर यह जवाब दे चुके हैं कि हाईकमान अगर कहेगा तो वे चुनाव लड़ेंगे। वैसे भी भोपाल और इंदौर से अभी जो नाम चर्चा में हैं, उन्हें जिताऊ प्रत्याशी नहीं माना जा रहा है। वहीं सूत्र बताते हैं कि दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के पुत्र और पूर्व सांसद संदीप दीक्षित को भी भोपाल सीट से लड़वाए जाने की चर्चा है। दीक्षित का भोपाल से पुराना संबंध भी है। हालांकि उनके नाम को लेकर पार्टी नेता चुप्पी साधे हैं। 

विधानसभा चुनाव में जीत के बाद महाकौशल में पार्टी का दबदबा बढ़ा है| इस बार महाकौशल को मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व भी कांग्रेस ने दिया है| जिसके चलते जबलपुर सीट पर भी कांग्रेस को सशक्त प्रत्याशी की तलाश है।  अगर कांग्रेस लोकतांत्रिक जनता दल के साथ समझौता करती है तो उन्हें जबलपुर सीट दी जा सकती है, जिसके राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव संभावित प्रत्याशी हो सकते हैं। प्रदेश के चौथे बड़े शहर ग्वालियर में भी पार्टी के पास अशोक सिंह के अलावा दूसरा सशक्त प्रत्याशी नहीं है। हालाँकि कुछ समय पहले तक ज्योतिरादित्य सिंधिया को यहां से चुनाव लड़ाई जाने की चर्चाओं ने जोर पकड़ा था, लेकिन वक्त के साथ यह मांग अब दब गई है, सिंधिया स्वयं गुना से ही चुनाव लड़ने की बात कर चुके हैं| जिसके बाद से यहां एक बार फिर दमदार प्रत्याशी की खोज जारी है|