प्रहलाद पटेल की बढ़ी मुश्किलें, नामांकन रोकने कांग्रेस नेत्री ने SC में दायर की याचिका

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भोपाल।

लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी की मुश्किले कम होने का नाम नही ले रही है। वर्तमान सांसद और दमोह लोकसभा सीट से पुन: प्रत्याशी बनाए गए प्रहलाद पटेल का आचार संहिता का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है।प्रदेश महिला कांग्रेस की महासचिव डाॅ. जया ठाकुर ने पटेल के खिलाफ दर्ज किए गए आचार संहिता उल्लंघन के मामले में कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। बता दे कि बीते दिनों ही उन पर केस दर्ज किया गया था।

 दरअसल, कांग्रेस नेता जया ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में मध्य प्रदेश के दमोह से बीजेपी उम्मीदवार पटेल को नॉमिनेशन से रोकने की भी मांग है। याचिकाकर्ता के मुताबिक  पटेल पर हाल ही में चुनाव आचार संहिता उल्लंघन का मामला दर्ज हुआ है। वही ठाकुर ने प्रेस नोट जारी कर कहा है कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धाराओं का उल्लंघन करने वाले लोगों का नॉमिनेशन रोका जाना चाहिए। साथ ही आचार संहिता के जो मामले दर्ज हो रहे हैं, उनकी सुनवाई सुप्रीम काेर्ट में जल्द से जल्द और समय सीमा में होनी चाहिए।  ऐसे व्यक्तियों का नॉमिनेशन होने से पहले रोका जाना चाहिए। क्योंकि चुनाव जीतने के बाद संबंधित व्यक्ति पर दर्ज शिकायतें दबा दी जाती हैं और उन पर किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं होती है।  बता दे कि पटेल ने अपने सरकारी आवास पर प्रेस कांफ्रेंस कर अपनी उपलब्धियों की किताब पत्रकारों को बांटी थी, जिसके बाद मामला दर्ज हुआ था।

ये है पूरा मामला

दमोह कोतवाली पुलिस ने सांसद पटेल के खिलाफ आचार संहिता उल्लंघन का प्रकरण दर्ज किया था। पटेल ने प्रेस कांफ्रेंस के दौरान अपने निवास पर प्रतिवेदन नामक पत्रिका बांटी थी। इस पुस्तक में मुद्रक का नाम और संख्या भी दर्ज नहीं थी। इस पर दमोह विधानसभा क्षेत्र के उड़नदस्ता दल 55-दमोह के आवेदन पर यह कार्रवाई की गई थी। एसडीएम रविंद्र चौकसे के मुताबिक टीम ने इस संबंध में सांसद पटेल से पूछताछ भी की थी। संतोषजनक जानकारी नहीं मिलने पर कार्रवाई की गई। बताया गया है कि पत्रिका छपवाने के दौरान उस पर मुद्रक का नाम और संख्या का उल्लेख होना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया है।

विवाद बढने के बाद पटेल ने दी थी सफाई

 मामला असंज्ञेय होने पर पुलिस ने सीजेएम से अनुमति ली और सूचना रिपोर्ट दर्ज की।हालांकि बढ़ते विवाद को रोकने के लिए पटेल ने इस पर सफाई भी दी थी।उन्होंने कहा था कि प्रेस कांफ्रेंस के वक्त उन्होंने पत्रिका प्रतिवेदन का कोई उल्लेख नहीं किया था। जानकारी जुटाने के लिए कुछ लोग इसे ले गए थे। पटेल ने बताया कि यह पत्रिका उन्हें 20 फरवरी को प्रधानमंत्री को जमा करनी थी, जो भेज दी गई थी। ये डेमो है, जो बहुत पहले प्रकाशित कराईं गईं थी। चुनाव से इसका कोई लेना-देना भी नहीं है।