कांग्रेस MLA ने ठोकी ताल-”जब VD शर्मा BJP से अध्यक्ष बन सकते तो मैं क्यों नहीं”

भोपाल।प्रदेश भाजपा के नए अध्यक्ष के नाम की घोषणा होने के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पर किसी नए चेहरे की ताजपोशी जल्द होने की संभावना बढ़ गई है।वही मुख्यमंत्री कमलनाथ के शनिवार को ग्वालियर में पीसीसी को लेकर दिए गए बयान के बाद प्रदेश में जमकर सियासत गर्मा गई है। एक बार फिर दावेदारों के बीच पीसीसी चीफ बनने की होड़ सी लग गई है। सूत्रों की मानें तो यह बात लगभग तय हो चुकी है कि मध्य प्रदेश के आदिवासी वर्ग को लुभाने के लिए प्रदेश कांग्रेस आदिवासी प्रदेशाध्यक्ष को प्रोजेक्ट कर सकती है। इसी कड़ी में पीसीसी चीफ की चर्चाओं और सिंधिया की नाराजगी के बीच अब बरगी से कांग्रेस विधायक संजय यादव ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के लिए दावेदारी ठोकी है।

इसको लेकर आज संजय ने प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया से भी मुलाकत की। हालांकि दोनों के बीच क्या बात हुई यह अभी तक पता नही चल पाया है। लेकिन मीडिया से चर्चा के दौरान संजय ने कहा कि जब बीजेपी में बीडी शर्मा प्रदेश अध्यक्ष हो सकते हैं तो कांग्रेस में मैं क्यों नहीं हो सकता हूं। मुझे भी संगठन का अनुभव है।खास बात ये है कि संजय यादव ने उस वक्त दावेदारी पेश की है जब समर्थक मंत्री-विधायक सिंधिया को पीसीसी चीफ बनाए जाने की मांग किए हुए है । वही पार्टी से सिंधिया की नाराजगी की चर्चाएं भी सरगर्म है।इसके पहले आदिवासी नेता और कांग्रेस विधायक बिसाहूलाल सिंह ने दावेदारी पेश की थी।

दरअसल, ग्वालियर में सीएम कमलनाथ के नए पीसीसी चीफ को लेकर दिए गए बयान के बाद से ही एमपी मे सियासी हलचल तेज हो चली है, जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रदेश को जल्दी ही पीसीसी चीफ मिल जाएगा। सोनिया गांधी नाम तय कर लेंगी। इसके बाद इंदौर में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा था कि एक हफ्ते में प्रदेश को नया कांग्रेस अध्यक्ष मिल जाएगा। उन्होंने कहा था कि एक हफ्ते में पीसीसी अध्यक्ष का ऐलान कर दिया जाएगा। इन दोनों दिग्गजों के ऐलान के बाद से ही दावेदारों की धड़कने तेज हो चली है ।फिलहाल ये पद अभी सीएम कमलनाथ के पास ही हैं।

खबर तो ये भी है कि कांग्रेस आलाकमान ने नया नाम तय कर लिया है, लेकिन फिलहाल वो नाम होल्ड कर रखा है। मध्यप्रदेश कांग्रेस की सियासी तकरार खत्म होने के बाद आलाकमान कांग्रेस के नए कप्तान के नाम का ऐलान करेगा।पार्टी को डर है कि गरमागरमी के माहौल में नाम का ऐलान होता है तो पार्टी को बड़ा नुक्सान उठाना पड़ सकता है।