मप्र : विधानसभा अध्यक्ष की दौड़ में BJP भी हुई शामिल, बढ़ सकती है कांग्रेस की मुश्किलें

Congress's-big-challenge-before-winning-the-election-of-the-Speaker

भोपाल।

विधानसभा अध्यक्ष के लिए कांग्रेस की ओर से गोटेगांव विधायक एनपी प्रजापति का नाम नाम तय कर लिया है। वहीं, अब बीजेपी भी विधानसभा अध्यक्ष के लिए दौड़ में शामिल हो गई है। कांग्रेस के सामने मुश्किल खड़ी करने के लिए बीजेपी ने भी अपना उम्मीदवार तय कर रखा है। प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह और बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने इस बात के संकेत भी दे दिए हैं। अब देखना है कि सियासी दांवपेच में कौनसी पार्टी बाजी मारती है।

दरअसल, 7 जनवरी से विधानसभा का का पहला सत्र शुरु होने जा रहा है, ऐसे में कांग्रेस की गुटबाजी और अंदरुनी खींचतान का फायदा उठाकर भाजपा अध्यक्ष पद के लिए अपना उम्मीदवार खड़ा करने की तैयारी में है, क्योंकि विधायकों की संख्या में बहुत ज्यादा अंतर नहीं है।बीजेपी के पास 109 विधायक हैं, वहीं कांग्रेस के पास 114  विधायकों की संख्या है, जबकि उसे बाहर से अन्य पार्टियों के विधायकों का समर्थन प्राप्त है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय नेतृत्व सोमवार सुबह इस बारे में अपना फैसला सुनाएगा, क्योंकि अध्यक्ष पद के लिए दोपहर 12 बजे तक ही नामांकन फॉर्म भरा जाएगा। भाजपा ने अध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ने के लिए विधानसभा से नामांकन फॉर्म रविवार को ही ले लिया था।कांग्रेस विधायक दल की बैठक शुरू होने से पहले भाजपा ने अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने का फैसला कर लिया था। भाजपा को उम्मीद थी कि बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी और निर्दलीय विधायक कांग्रेस की बैठक में नहीं जाएंगे, लेकिन करीब 120 विधायकों के बैठक में पहुंचने के बाद भाजपा ने अपना फैसला बदल लिया और इस पर देर रात तक फिर पुनर्विचार चलता रहा। 

 इस बात के मीडिया से चर्चा के दौरान बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय और प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह ने संकेत भी दिए। कैलाश विजयवर्गीय ने कहा पार्टी में इस पर विचार हो रहा है। सोमवार सुबह प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे और प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह बैठक कर इस विषय पर निर्णय लेंगे।वही राकेश सिंह का कहना है कि  विधानसभा अध्यक्ष के लिए  बीजेपी भी उम्मीदवार खड़ा कर सकती है।इसको लेकर दिल्ली से लेकर भोपाल में मंथन चल रहा है। वही इस खबर के कांग्रेस में हड़कंप मच गया है।अगर भाजपा अपनी तरफ से कोई उम्मीदवार खड़ा करती है तो वह कांग्रेस के लिए चुनौती साबित हो सकता है। 

ये नाम सबसे आगे 

भाजपा विधानसभा अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ती है तो पहले नंबर पर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीतासरन शर्मा का नाम होगा। इसके अलावा पार्टी वरिष्ठ विधायक केदारनाथ शुक्ला, राजेंद्र शुक्ला को भी सामने ला सकती है।

ऐसे समझे सीटों का गणित

अगर सदन के मौजूदा सियासी गणित की बात करें तो कांग्रेस के खुद के 114 विधायक सदन में हैं। सपा के 1, बसपा के 2 और चार निर्दलीय विधायकों के समर्थन से सदन में सरकार के पक्ष में कुल विधायकों की संख्या 121 है, वहीं बीजेपी 109 विधायकों के साथ विधानसभा में विपक्ष में मौजूद है।जिस तरह कांग्रेस के अंदर और उसको समर्थन देने वाले पार्टियों और निर्दलीय विधायकों में खींचतान मची हुई है, उससे कांग्रेस के लिए विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव जीतना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है।

ऐसे चुना जाता है विधानसभा स्पीकर

जब भी किसी प्रदेश में चुनाव होते हैं और नई सरकार बनती है तो विधानसभा में सबसे पहला काम होता है अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चयन। आमतौर पर सत्ताधारी पार्टी या गठबंधन का कोई विधायक ही स्पीकर होता है। सबसे वरिष्ठ सदस्य को स्पीकर चुना जाता है और ध्वनिमत से विधायक अपनी स्वीकृति देते हैं। स्पीकर का काम विधानसभा की कार्रवाई को संचालित करना है। वह संविधान के नियमों के मुताबिक सदन संचालित करता है। जब स्पीकर मौजूद नहीं होता है तो उपाध्यक्ष सदन संचालित करता है। सभी सदस्य स्पीकर का सम्मान करते हैं और उनकी हर बात ध्यान से सुनते हैं। स्पीकर अगली सरकार के बनने तक इस पद पर रहता है। स्पीकर को पद से हटाने के लिए सदन में प्रस्ताव लाना होता है। इसके लिए 14 दिन पूर्व ही नोटिस दिए जाने का नियम है।