कैबिनेट गठन के बाद भाजपा विधायकों की नाराजगी पर कांग्रेस की नजर!

भोपाल| चौथी बार सीएम बने शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan)ने 28 दिन बाद अपने मंत्रिमंडल (Cabinet) का गठन कर दिया| कोरोना संकटकाल के चलते छोटा कैबिनेट बनाया गया है| जिसके चलते मंत्री बनने के इच्छुक कई बड़े नेताओं को मौका नहीं मिल सका, हालाँकि कहा जा रहा है कि बाद में कैबिनेट विस्तार किया जाएगा| लेकिन मंत्रिमंडल में एक सीमा है और दावेदारों की संख्या अधिक| ऐसे में भाजपा में नाराजगी देखने को मिलेगी| वहीं कांग्रेस ने भाजपा विधायकों (Bjp Mla’s)की नाराजगी पर नजर रखना शुरू कर दिया है। यह रणनीति उपचुनाव में कांग्रेस को फायदा पहुंचा सकती है|

अब जब भाजपा ने ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) और उनके 22 समर्थकों को पार्टी में शामिल करके कमलनाथ के नेतृत्व वाली सरकार को पछाड़ दिया है, तो कांग्रेस ने भी इसका जवाब देने के लिए भाजपा में उठ रही हर चिंगारी पर अपनी नजरें जमाना शुरू कर दिया है। अपने बयानों के माध्यम से कांग्रेस के नेताओं ने उन भाजपा नेताओं को उकसाना शुरू कर दिया है जिन्हें मंत्रिमंडल बनाने के समय दरकिनार कर दिया गया।

भाजपा के नाराज नेताओं पर नजर
राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा, पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, उमंग सिंघार, जीतू पटवारी और अन्य ने भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं करने का मुद्दा उठाना शुरू कर दिया है। कांग्रेस नेताओं द्वारा कहा जा रहा है कि भाजपा ने मंत्रिमंडल बनाने के समय ईमानदार और कड़ी मेहनत करने वाले नेताओं को दरकिनार कर दिया। मंत्रियों के शपथ ग्रहण समारोह में भी कई बड़े दिग्गज नेता नदारद रहे|

भाजपा नेताओं की उपेक्षा को कांग्रेस बना रही मुद्दा
कांग्रेस ने गोपाल भार्गव, भूपेंद्र सिंह, राजेंद्र शुक्ला, विजय शाह, यशोधरा सिंधिया, नागेंद्र सिंह, रामपाल सिंह, मालिनी गौड़ और महेंद्र हार्डिया जैसे नेताओं को दरकिनार करने का मुद्दा उठाया है। पार्टी मंत्रिमंडल के विस्तार पर नजर रख रही है। इससे पहले, कांग्रेस के नेताओं ने दावा किया था कि कुछ भाजपा नेता उनके संपर्क में थे। मंत्रिमंडल विस्तार के बाद, कांग्रेस भाजपा को जवाब देने की कोशिश करेगी| बागी नेताओं को एकजुट कर भाजपा को झटका देने के लिए कांग्रेस प्रयास करेगी। भाजपा में, 50 ऐसे नेता हैं जो मंत्रिमंडल में शामिल होने की ख्वाइश रखते हैं, लेकिन विस्तार में केवल 20 ही बनेंगे, इसलिए भाजपा विधायकों में नाराजगी का फायदा कांग्रेस उठा सकती है।

सिंधिया समर्थक, निर्दलीय और अन्य को साधना होगी चुनौती
ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक और कुछ पूर्व विधायक, जो भाजपा में शामिल हो गए, मंत्री बनने के इच्छुक हैं। सिंधिया समर्थकों में प्रद्युम्न सिंह तोमर, इमरती देवी, महेंद्र सिंह सिसोदिया और प्रभुराम चौधरी को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाना बाकी है। उनके अलावा, राज्यवर्धन सिंह भी मंत्री बनना चाहते हैं। बीजेपी ने बिसाहूलाल सिंह, इंदल सिंह कंसाना और हरदीप सिंह डांग को भी आश्वासन दिया था कि उन्हें मंत्री बनाया जाएगा। वहीं बसपा और सपा के विधायक संजीव कुशवाह, रामबाई और राजेंद्र शुक्ला भी मंत्री बनने के इच्छुक हैं।