विवादित थाना प्रभारी की राजधानी में पोस्टिंग, पुलिस महकमे में उठ रहे सवाल!

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भोपाल।फराज शेख |राजधानी के मलाईदार थाना मंगलवारा में विवादित थाना प्रभारी संजय वर्मा की पोस्टिंग इन दिनों पुलिस मेहकमे में चर्चा का विषय बनी हुई है। वजह उनका काला अतीत है। जो यहां भी उनका पीछा नहीं छोड़ रहा है। बताया जाता है कि वे जहां भी रहे भ्रष्टाचार के आरोप आम रहे हैं। उज्जैन में पदस्थ रहने के दौरान सटोरियों से एक रात में 21 लाख रूपए की वसूली के इस थाना प्रभारी पर आरोप रहे हैं। वहीं उज्जैन में ही एक निर्दोष को इन्होंने हिरासत में लिया और इस कदर प्रताडि़त किया कि उक्त व्यक्ति ने थाने मेें ही खुदको आग लगाकर खुदकुशी का प्रयास किया। वहीं इंदौर में पदस्थापना के दौरान इनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप रहे। इनका एक साथी रिश्वत लेते रंगे हाथों ट्रेप किया गया था। हालांकि टीआई कितने भ्रष्ट हैं, इस बात का खुलासा तो उनके खिलाफ चल रही जांच पूरी होने पर ही हो सकेगा। फिलहाल उनके किस्से भोपाल पुलिस के अधिकारी कर्मचारियों के बीच चटकारों का सबब बने हुए हैं। 

किस्सा-1:- लाखों रूपए की वसूली के आरोप

टीआई संजय वर्मा उज्जैन में लंबे समय तक पदस्थ रहे हैं। वहां के नागझिरी थाने में पदस्थ रहने के दौरान उन्होंने एक सटोरिए को हिरासत में लिया था। जिसके मोबाइल और हिसाब के रजिस्टर में मिले नंबरों के आधार पर लग-भग एक दर्जन अन्य सटोरियों को रातों रात रत्लाम व आस पास के क्षेत्रों से उठा लिया गया। इस काम को अंजाम देने में टीआई का खास शेरू नाम का युवक भी शामिल था। एक ही रात में नागझिरी थाना प्रभारी रहते टीआई संजय वर्मा व उनके स्टॉफ ने करीब 21 लाख रूपए की वसूली कर ली। इस मामले की जांच चल रही है। 

किस्सा-2:- प्रताडि़त युवक ने लगा ली थी खुदको आग

उज्जैन के चिमनगंज थाने में पदस्थ रहते एक युवक को शिकायती आवेदन के आधार पर टीआई संजय वर्मा की अगवाही में उठा लिया गया था। इसके बाद में थाने में उसे फर्जी मुकदमें में फंसाने को लेकर इस कदर डराया गया कि उक्त व्यक्ति ने खुदको आग लगा ली थी। इस घटना के बाद में टीआई ने जैसे तैसे मामले को मैनेज किया था। सूत्रों की माने तो बाद में इस केस के फरियादी ने शपथ पत्र देकर टीआई को निर्दोष बताया था।

किस्सा-3:-नप गए थे साथी एसआई

इंदौर के एक थाने में पदस्थ रहने के दौरान टीआई संजय वर्मा के स्टाफ के एक एसआई को हजारों रूपए की रिश्वत लेते ट्रेप किये जाने की चर्चा भी इन दिनों आम है। अय्यार बताते हैं कि इस मामले में टीआई का नाम सीधे तौर पर तो सामने नहीं आया था। हालांकि इस मामले के प्रकाश में आने के बाद में आला अधिकारी उनसे नाराज थे। जिसके चलते उन्हें इंदौर से बिदाई दे दी गई थी।