लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़, बैक्टीरिया मिला पानी हो रहा सप्लाई

भोपाल। भारतीय मानक ब्यूरो की जांच में नगर निगम द्वारा शहर में सप्लाई किए जा रहे पानी में बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है। ऐसे में नगर निगम को नए सिरे से पानी को लेकर समीक्षा की जरूरत महसूस होने लगी है। निगम प्रशासन का दावा है कि पानी सप्लाई करने के दौरान क्लोरीन की जांच की जाती है, इसके अलावा शहर के हर एरिया की रोजाना जांच की जाती है। इससे पानी की बैक्टीरिया का सवाल ही नहीं उठता।

निगम द्वारा पानी की शुद्घता के लिए क्लोरीन मिलाया जाता है, लेकिन दो घंटे में क्लोरीन पानी से उड़ जाता है। ऐसे में यदि बीच में कहीं लीकेज के कारण गंदगी मिलती है तो बैक्टीरिया मिलने की आशंका होती है। निगम की मजबूरी ये है कि टंकियां पानी भरने के कुछ घंटों बाद सप्लाई किया जाता है। डब्ल्यूएचओ की तय मापदंडों के हिसाब से घरों में पहुंचने वाले पानी में रेसीड्ूअल क्लोरीन की मात्रा 0.2 पीपीएम होना चाहिए। इससे कम क्लोरीन की मात्रा मिलने पर बैक्टीरिया पानी में रह जाते हैं। ऐसे में पानी की गुणवत्ता खराब हो जाती है। बता दें कि निगम द्वारा जेएनएनआरयूएम और अमृत योजना के तहत ज्यादातर पाइप लाइनों को बदला चुका है। ऐसे में बैक्टीरिया मिलना भी चिंताजनक है। जानकारों का कहना है कि सीवेज लाइनों और पाइप लाइनों के बीच निर्धारित दूरी का पालन नहीं किए जाने से पानी में बैक्टीरिया मिल सकते हैं। कई जगह सीवेज लाइनों के साथ ही ही पाइप लाइन बिछाई गई है।

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