दागियों की पोस्टिंग से दागदार हो रही क्राइम ब्रांच, कार्रवाई से कतरा रहे अधिकारी

भोपाल। फराज शेख| हार्डकोर क्रिमनलों पर नकेल कसने के लिए बनी क्राइम ब्रांच अपने मुख्य उद्देश्य से भटक चुकी है। क्राइम ब्रांच पर लगातार जुआरियों, सटोरियों को संरक्षण और वसूली के आरोप आम होते जा रहे हैं। बावजूद इसके क्राइम ब्रांच जमे दागियों को अधिकारी हिला नहीं पा रहे हैं। इन मठाधीशों में कई नाम ऐसे हैं जो दो से तीन बार क्राइमब्रांच से बाहर हो चुके हैं और लौटकर फिर वहीं आ जाते हैं। हर बार क्राइम ब्रांच में आसानी से इनकी पोस्टिंग होने का कारण राजनेतिक और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का संरक्षण बताया जाता है। कई बार इन पुलिसकर्मियों के खिलाफ गंभीर शिकायतें होती हैं। हालांकि इनके आकाओं के दबाव में आकर अधिकारी जांच में लीपापोती कर इन्हे बचा लेते हैं।

– इन दागियों का जमा है क्राइम ब्रांच में डेरा

एसआई आरएस दांगी: रातीबढ़ थाने के प्रभारी रहने के दौरान डेम के चौकीदारों से मारपीट की। चौकीदार ने फ्री की मछली न देने के एवज में मारपीट के आरोप लगाए थे। शिकायत आला अधिकारियों तक की गई। तत्कालीन डीआईजी धर्मेंद्र चौधरी ने अपने पास रीडर के तौर पर अटैच कर लिया।

एएसआई दिनेश सिंह: क्राइम ब्रांच में लंबे समय से जमे हैं। यहां से ट्रांसफर हो गया था। राजनेतिक एप्रोच का इस्तमाल किया। दोबारा क्राइम ब्रांच में पोस्टिंग करा ली।

आरक्षक इमाम उद्दीन:- गंभीर आरोपों के बाद जिले से बाहर ट्रांसफर हुआ। राजनेतिक पहुंच का लाभ लिया। आकाओं ने पैरवी की भोपाल अटैचमेंट हुआ,बाद में यहीं पोस्टिंग करा ली और तीन साल से क्राइम ब्रांच में जमे हैं। इससे पूर्व भी वह क्राइम ब्रांच में ही पदस्थ थे।

नितेश सिंह: क्राइम ब्रांच से ट्रांसफर हो चुका है। लौटकर दोबारा क्राइम ब्रांच में आए। यह भी रातनेतिक कृपा प्राप्त बताए जाते हैं।

आरक्षक अविनाश मेघ खत्री: चोरी का लोहा बेचने के गंभीर आरोप में क्राइम ब्रांच से बर्खास्त किए गए। रहने वाले जहांगीराबाद के ही हैं, कोर्ट के आदेश पर बहाल हुए और जहांगीराबाद थाने में ही मनचाही पदस्थापना ली। यहां स्टाफ से अनबन और गंभीर आरोपों में घिरे तो मनचाही पोस्टिंग क्राइम ब्रांच में करा ली। इनके करीबी रिश्तेदार और मुख्य संरक्षक एक आला अधिकारी के रीडर हैं।

प्रधान आरक्षक महेंद्र सिंह: पूरी नौकरी विवादों में गुजर रही है। करीब सात माह पूर्व गंभीर आरोपों में ऐशबाग थाने से लाइन अटैच हुए। दिल्ली में बैठे मुख्य संरक्षक और वरिष्ठ आईपीएस को कॉल घनघनाया। उन्होंने पैरवी की और मनचाही पोस्टिंग लाइन अटैच रहने के चंद दिनों के भीतर क्राइम ब्रांच में करा ली। यहां भी वसूली के आरोपों में घिरे हुए हैं। पैरवी करने वाले आईपीएस इनकी असलियत से वाकिब नहीं हैं।

पंजाब राव: पूर्व में उनका ट्रांसफर हो चुका है। कुछ दिन का वनवास अन्य थानों में काटा और लौटकर क्राइम ब्रांच आ गए।

अजय बाचपेयी: क्राइम ब्रांच से पूर्व में ट्रांसफर हो चुका है। कुछ दिन यहां वहां बिताने के बाद दोबारा क्राइम ब्रांच में पोस्टिंग करा ली।

आरक्षक अनुराग पटेल: क्राइम ब्रांच से लाइन अटैच हुए थे। दोबारा वहीं पोस्टिंग कराकर लंबे समय से जमे हुए हैं।

आरक्षक मुशताक: पिस्टल तस्करी के एक मामले को पकडऩे के बाद हेराफेरी के आरोप में क्राइम ब्रांच से ही लाइन अटैच हुए। बाद में क्राइम ब्रांच में ही पोस्टिंग करा ली। दोबारा आने के बाद लंबे समय से जमे हुए हैं। इनको भोपाल में पदस्थ रहे एक डीआईजी का करीबी माना जाता है।

आरक्षक राजन मालवीय: क्राइम ब्रांच में ही नौकरी गुजार रहे हैं। एक बार ट्रांसफर हुआ दोबारा लौटकर आए। लंबे समय जमे रहे। बाद में रिफ्रेशर कोर्स भेजा गया। पोस्टिंग बैरागढ़ थाने में है। इन्होंने एक बार फिर क्राइम ब्रांच में जाने के आदेश गुपचुप तरीके से करा लिए हैं। हालांकि अभी रवानगी नहीं मिली है।