प्रदेशभर के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों का 31 अगस्त को प्रदर्शन, राज्यपाल से करेंगे इच्छामृत्यु की मांग

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के आह्वान पर 31 अगस्त को प्रदेश भर के संविदा कर्मचारी प्रदर्शन करेंगे और राज्यपाल तथा मुख्यमंत्री से इच्छामृत्यु की अनुमति दिए जाने की अपील करेंगे। इसके लिए राज्यपाल और सीएम को खून से लिखे हुए हजारों पोस्टकार्ड भेजे जाएंगे साथ ही कार्यस्थल में पोस्टर प्रदर्शन करेंगे।

संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ का कहना है कि शासन से नियमित करने का, 90 प्रतिशत वेतनमान देने का हमारा आवेदन आजतक स्वीकार नही किया है इसलिए अब सरकार इच्छामृत्यु की अनुमति आवेदन ही स्वीकार कर लें, इससे हमें संविदा से मुक्ति मिलेगी। सरकार हमें और कुछ तो दे नही पाई संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों को,इच्छामृत्यु ही दे दे। अब अपनी मांगों को लेकर कोरोना से दिनरात जंग लड़ रहे प्रदेश भर के 19000 संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने प्रदर्शन करने की घोषणा की है। इनमें संविदा चिकित्सक, नर्स, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन,  एएनएम, प्रबन्धन इकाइयां, ऑपरेटर, आयुष, एड्स, टीबी परियोजना के समस्त कर्मचारी शामिल होंगे और थाली में आधी रोटी के साथ प्रदर्शन करेंगे।

बता दें कि नियमितीकरण न किये जाने एवं 5 जून 2018 सामान्य प्रशासन की संविदा नीति, नियमित समकक्ष पद, 90 प्रतिशत वेतनमान राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में 2 साल बीत जाने के बाद भी लागू न होने से संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों में सरकार के प्रति आक्रोश है। कोविड 19 में ड्यूटी के दौरान 6 संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की आकस्मिक मृत्यु हुई है लेकिन स्वास्थ्य विभाग और प्रदेश सरकार द्वारा किसी भी शहीद कोरोना योद्धा के परिवार को 50 लाख रुपये व अनुकम्पा नियुक्ति नहीं दी गई। मुख्यमंत्री कोविड 19 कल्याण योजना से भी संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी वंचित है तथा इन्हें  10,000/- की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी नहीं दी जा रही है। इनका कहना है कि ये बिना बीमा, पेंशन, अनुकम्पा, सामाजिक सुरक्षा, मंहगाई-दैनिक भत्ते और नियमित की तुलना में आधे वेतन में काम कर रहे हैं। इन्होने सरकार पर आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार द्वारा स्वयं अपनी सरकार के द्वारा निर्मित और पारित हो चुके नियमों का पालन कराने में पूर्णतः नाकाम रही है।

प्रदेशभर के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों का 31 अगस्त को प्रदर्शन, राज्यपाल से करेंगे इच्छामृत्यु की मांग