कही दागी ना बन जाए अधिकारी, वन विभाग में पड़ताल जरूरी

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। आने वाले कुछ दिनों में राज्य वन विभाग के अधिकारियों को आईएफएस अधिकारी बनाया जाना है। लेकिन इनमें कुछ ऐसे नाम है जिन पर वित्तीय अनियमताओं का आरोप है ऐसे ही एक अधिकारी है सहायक वन संरक्षक सुशील कुमार प्रजापति, सुशील कुमार प्रजापति पर आरोप है कि तत्कालीन उपवनमण्डल अधिकारी के तौर पर उत्तर सागर में पदस्थापना के दौरान 1500 ट्री गार्ड का लेखा जोखा यह नही दे पाए थे,यह वह ट्री गार्ड थे जो खरीदना और लगाना दर्शाया गया था मगर जब जांच की गई तो 1500 ट्री गार्ड अपनी जगह पर नही मिले और संबंधित अधिकारी इसके बारे में कोई जबाब भी नही दे पाए।

अबतक एक और हेमंत रायकवार भी ओबेदुल्लागंज वन मण्डल मे पोस्टिंग के दौरान आर्थिक गडबडी मे फंस चुके हैं। । इसके अलावा केलास भ्त्करिया के विरुध भी प्रकरण को प्रधान मुख्य वन संरक्षक, मप्र द्वारा कोई कार्यवाही न करने पर लाभान्वित हो जायेगे।  जिसके बाद विभाग ने इन पर 04 लाख 89 हजार 987 रुपये वसूलने के आदेश दिए थे। सुशील कुमार प्रजापति पर और भी कई इसी तरह के आरोप है।

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ऐसे में इन अधिकारियों से क्या उम्मीद की जा सकती है कि अगर इन्हें आईएफएस अधिकारी बनाया जाता है तो यह आखिर किस तरह से वन्य संपदा और वन प्राणियों की सुरक्षा करेगे।फिलहाल विभाग में राज्य वैन सेवा के कई ऐसे योग्य अधिकारी है। जिन्हें मौका मिलता है तो वह न सिर्फ विभाग बल्कि वन और वन्य प्राणियों की सुरक्षा के लिए भी कारगर साबित होंगे। हालांकि विभाग को इन अधिकारियों को आईएफएस बनने का मौका देने से पहले जांच पड़ताल करनी जरूरी होगी।