E-Tender-scam--now-question-raised-on-the-Shivraj-Sarkar

भोपाल| देश के बहुचर्चित ई टेंडर घोटाले में अब एक नई कहानी सामने आई है। आजकल सरकारी मंचों पर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान लगातार कह रहे हैं कि ई टेंडर घोटाले का पर्दाफाश मैने किया और जांच भी मैने  शुरू कराई। जबकि हकीकत यह है कि L&T कंपनी द्वारा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से की गई शिकायत के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय के जवाब में यह जांच शुरू की गई लेकिन मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों की संलिप्तता के चलते यह कार्रवाई कछुआ गति से चलाने के निर्देश दिए गए। 

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब 13 मई 2018 को यह बात सामने आ चुकी थी कि 3 टेंडरों में टेंपरिंग कर ठेके हासिल किए गए हैं और इसके साथ ही कई अन्य क्षेत्रों में भी ई टेंडरिंग टेंपरिंग के माध्यम से घोटाले की संभावना है, तो फिर सरकार ने इसी सिस्टम को 31 दिसंबर तक क्यों चलने दिया। यदि राज्य सरकार और एमपीएसईडीसी इस पूरे मामले में गंभीर होती तो तत्काल एंट्रेंस कंपनी के माध्यम से होने वाले सभी ई टेंडरो की प्रक्रिया को तत्काल रोक देती लेकिन ऐसा नहीं किया गया और बाद के टेन्डरो में भी यह गड़बड़ी 31 दिसंबर तक दोहराई जाती रही। 

जाहिर सी बात है कि मुख्यमंत्री सचिवालय के अधिकारियों की संलिप्तता के चलते यह घोटाला लगातार चलता रहा। इसके पीछे एक बड़ा कारण घोटाले में शामिल आला अधिकारियों को यह अति आत्मविश्वास था कि एक बार फिर शिवराज सरकार सत्ता में वापसी करेगी और और ऐसे घोटालों पर आराम से धूल डाल पाएंगे|