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भोपाल| ई-टेंडर घोटाला मामले में राज्य आर्थिक अपराध अनुसंधान ब्यूरो यानि ईओडब्लू जल्द एक बड़ा खुलासा कर सकती है। सूत्रों की मानें तो इस मामले में गिरफ्तार मध्य प्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक विकास निगम के ओएसडी नंदकिशोर ब्रह्मे ने कुछ चौंकाने वाले खुलासे किये है। इन खुलासों में मध्य प्रदेश सरकार के जिन विभागों में ई टेंडर टेंपरिंग करके गड़बड़ी की जाती थी, उन विभ���गों में पदस्थ आईएएस अधिकारियों को ई टेंडर में गड़बड़ी करके उपकृत होने वाली कंपनियां ठेके के बदले निश्चित राशि कमीशन के रूप में देती थी। 

हैरत की बात यह है कि अधिकारियों ने इस राशि के लिए बीच में दलाल बना रखे थे जिनके बैंक खातों में इस राशि का एक बड़ा हिस्सा जमा होता था और बाकी राशि नगद के रूप में पहुंचाई जाती थी। ईओडब्ल्यू को अब तक लोक निर्माण विभाग, नगरीय प्रशासन विभाग ,नर्मदा घाटी ,जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग में गड़बड़ी के पर्याप्त सबूत मिले हैं। अधिकारी जिन दलालों के माध्यम से रिश्वत लेते थे  वे भी चिन्हित कर लिए गए हैं। जिन आईएस अधिकारियों के द्वारा रिश्वत लिए जाने के सबूत मिले हैं उनमें ज्यादातर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सचिवालय में पदस्थ रहे हैं। सूत्रों की मानें तो आने वाले चार पांच दिनों के भीतर प्रदेश के कुछ वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के खिलाफ  ईओडब्लू एफ आई आर दर्ज कर सकता है।