नीतिगत फैसला नहीं ले सकती शिवराज कैबिनेट, होगा आचार संहिता का उल्लंघन : चुनाव आयोग

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भोपाल।

मतगणना से पहले कल बुधवार को मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार द्वारा कैबिनेट बैठक बुलाई गई है। कैबिनेट बैठक के लिए अब तक चुनाव आयोग से मंजूरी नही ली गई है।इस बारे में आज मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी वीएल कांताराव का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा है कि कैबिनेट की बैठक को लेकर चुनाव आयोग को कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। शासन की ओर से किसी भी तरह का बड़ा निर्णय या फिर पॉलिसी पर कोई भी निर्णय नहीं लिया जा सकता, इसे लेकर चुनाव आयोग से अनुमति जरूरी है लेकिन अभी तक कोई पत्र चुनाव आयोग को नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि आयोग की इजाजत के बिना कैबिनेट कोई नीतिगत फैसला नहीं ले सकती है और अगर ऐसा होता है तो वो आचार संहिता के उल्लंघन के दायरे मे आएगा ।

दरअसल, पांच दिसंबर को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कैबिनेट बैठक बुलाई है। इसमें पूर्व में रूक करीब 14 प्रस्तावों पर कैबिनेट से अनुसमर्थन होना है। ।इनमें अध्यापक संवर्ग के लिए जारी हुए आदेश, किसानों के लिए 200 रुपए बोनस सहित कुल 14 मामले हैं। इसके अलावा डेंगू और जीका वायरस को लेकर भी बैठक में चर्चा होना है। इसके लिए सभी मंत्रियों को फोन पर सूचना दी गई है लेकिन राज्य सरकार को इससे पहले चुनाव आयोग से इस संबंध में अनुमति लेना होगी, लेकिन अबतक इस संबंध मे कोई अनुमति नही ली गई है।

कांग्रेस ने जताई आपत्ति

पांच तारीख को सरकार ने कैबिनेट की बैठक बुलाई है जिसे लेकर कांग्रेस लगातार हमलावर हो रही है।कांग्रेस का कहना है कि प्रदेश में मतदान हो चुका है। आचार संहिता पहले से लागू है ऐसे में सरकार सिर्फ कार्यवाहक सरकार है। इसके पास किसी भी तरह की बैठक बुलाने और निर्णय लेने का अधिकार नहीं है। अगर ऐसा किया जा रहा है तो यह सीधे तौर पर सत्ता का दुरुपयोग है।   कांग्रेस ने इलेक्शन कमिशऩ को सीएम के मंत्रालय जाने को लेकर भी शिकायत की है।  कांग्रेस ने जहां इसे नियमों के खिलाफ बताया हिया और चुनाव आयोग से बैठक पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की मांग की है।

बीजेपी बोली-अनुमति नही लेगी सरकार

वही जनसंपर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने साफ कहा है कि कैबिनेट की बैठक के लिए सरकार आयोग से कोई अनुमति नहीं लेगी। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि हमें भी आचार संहिता के नियमों की जानकारी है।  इसके पहले एक अन्य मंत्री विश्वास सारंग ने कहा था कि कैबिनेट की बैठक की प्रक्रिया संवैधानिक रूप से सही है, कांग्रेस इतने साल सत्ता में रही। फिर उन्हें नियम और कानून का ज्ञान नहीं है।