आचार संहिता के फेर में फंसा ‘सामूहिक विवाह’, आयोग से मांगी अनुमति

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भोपाल। प्रदेश में सात मई को अक्षय तृतीया है और इस अबूझ मुहूर्त पर सर्वाधिक विवाह होते हैं। ऐसे मौके पर विवाह कराए जा सकें, इसके लिए सामाजिक न्याय एवं नि:शक्तजन कल्याण विभाग चुनाव आयोग पहुंच गया है। विभाग ने आयोग से विवाह कार्यक्रम कराने की अनुमति मांगी है।

इस साल अप्रैल, मई और जून में सर्वाधिक 37 विवाह मुहूर्त हैं। इनमें से मार्च के पांच और अप्रैल के छह शुभ मुहूर्त में सामूहिक विवाह कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जा सके, क्योंकि लोकसभा चुनाव के मद्देनजर देशभर में आचार संहिता प्रभावी है। ाज्य सरकार की सामूहिक विवाह योजना (कन्यादान और निकाह) पर आचार संहिता का ग्रहण लग गया है। वैवाहिक सीजन का बड़ा समय निकल गया, लेकिन सरकारी सामूहिक विवाह कार्यक्रम आयोजित नहीं हो पा रहे हैं। इससे गरीब परिवारों को यह सरकारी लाभ नहीं मिल रहा है।

चूंकि मुख्यमंत्री कन्यादान योजना और निकाह योजना में आर्थिक व्यवस्था सरकार की होती है। इसलिए मार्च में आचार संहिता लागू होते ही सामूहिक विवाह कार्यक्रमों पर रोक लग गई। इससे अब वे लोग परेशान हो रहे हैं, जिन्होंने विवाह की तारीखें पहले से तय कर ली थीं। उन्हें उम्मीद थी कि निरंतर जारी योजना पर रोक नहीं लगेगी। सूत्र बताते हैं कि विभाग ने करीब 15 दिन पहले यह प्रस्ताव आयोग को भेजा है, लेकिन उस पर अभी तक फैसला नहीं हुआ है। उधर, मैदानी स्तर पर आर्थिक तंगी से परेशान और इस योजना के भरोसे बेटियों के विवाह तय करने वाले लोग परेशान हैं। लोगों का कहना है कि अप्रैल में अभी भी चार मुहूर्त शेष हैं और मई में 14 मुहूर्त हैं।