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भोपाल।

मध्यप्रदेश के हरदा जिले में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में गड़बड़ी का एक नया मामला सामने आया है। यहां किसानों किसानों को उनके हक के हिसाब से बीमा के पैसे नही दिए गए। किसी को 10 रुपए का क्लैम दिया गया तो किसी को 20 । इस संबंध में किसानों ने कई बार ज्ञापन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई लेकिन कोई हल नहीं निकला। इसके बाद किसानों ने शासकीय कंपनी एग्रीकल्चर इंश्योरेंस बीमा कंपनी के खिलाफ उपभोक्ता फोरम में केस दायर कर इंसाफ की लड़ाई लड़ी और जीत हासिल की।फोरम ने किसानों के हक में फैसला सुनाया और 6  हजार की जगह किसानों को 20  हजार का जुर्माना देने के आदेश दिए।फोरम के फैसले के बाद किसानों में खुशी की लहर है।

          दरअसल, बीते साल प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में खरीफ वर्ष में किसानों को बीमा कंपनी ने जो क्लेम दिया वह बहुत ही कम था। जिसके बाद से किसानों में रोष व्याप्त हो गया था।इसके बाद किसानों ने शासकीय कंपनी एग्रीकल्चर इंश्योरेंस बीमा कंपनी के खिलाफ उपभोक्ता फोरम में एडवोकेट अनिल जाट की सहायता से केस दायर किया और कोर्ट ने किसानों के हक में फैसला सुनाया। कोर्ट ने किसानों को बीस हजार का क्लेम देने का फैसला सुनाया, जबकी कंपनी ने किसानों को सिर्फ 6  हजार के क्लेम का हकदार बनाया था।बिछापुर के किसान गंभीर सिंह जाट को खरीफ फसल की बीमा राशि के रूप में 13 एकड़ के हिसाब से 5,946 रु. मिले थे। उपभोक्ता फोरम में केस जीतने के बाद खाते में 23 जनवरी को 1,10,437 रुपए आए।  कोर्ट के फैसले के बाद किसानों के खाते में 20 गुना तक ज्यादा राशि आई है।राशि पाकर किसानों मे खुशी की लहर है।

बता दे कि यूनियन के एडवोकेट अनिल जाट ने बीमा कंपनी के खिलाफ केस दायर कर किसानों की लड़ाई की शुरुआत की थी। इस पर बीमा कंपनी और बड़े- बड़े वकील कंपनी के पक्ष में आए मगर वे जाट के दावों को खारिज नहीं कर सके और किसानों को जीत मिली। एडवोकेट अनिल जाट ने कहा कि मैं किसान का बेटा हूं। इसलिए किसानों के साथ खड़ा हूं। यह केस हमारे लिए महत्वपूर्ण था, क्योंकि इस योजना से किसान का करोड़ों का नुकसान हुआ है और कार्पोरेट को फायदा हुआ। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए आगे भी लड़ता रहूंगा।