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भोपाल| मध्य प्रदेश में कांग्रेस के सहयोगी संगठन जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) ने राज्य में सत्तारूढ़ दल (कांग्रेस) को बागी तेवर दिखाते हुए जनजातीय समुदाय के लिए आरक्षित दो लोकसभा सीटों धार एवं रतलाम सीट पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं|  जयस यहां के राजनीतिक समीकरण बिगाड़ सकता है। धार में अवैध शराब का एक बड़ा मुद्दा है जिसके खिलाफ जयस ने मुहीम छेड़ रखी है| सीमावर्ती जिला होने के नाते यहां शराब माफिया बड़े पैमाने पर सक्रिय है और धड़ल्ले से न सिर्फ अवैध शराब का कारोबार होता है बल्कि पडोसी राज्य भी अवैध रूप से शराब की खेप पहुंचाई जाती है| इस काले कारनामे के लिए जयस ने ताल ठोकी है| जयस के समर्थक, आरटीआई एक्टिविस्ट और व्यापमं के व्हिसिल ब्लोअर डॉ आनंद राय का कहना है कि अवैध शराब के खिलाफ हमने लड़ाई लड़ी है और हमारी लड़ाई आगे भी जारी रहेगी| 

डॉ राय ने कहा कि सब जानते हैं शहर में अवैध शराब का कारोबार कौन करा रहा है, और किन लोगों के संरक्षण में शराब का अवैध परिवहन होता है| पिछले 30 साल से झाबुआ अलीराजपुर और धार अवैध शराब का गढ़ बन चुका है| लाइसेंस धारी दुकानों के अलावा ढेरों गांवों से भी अवैध शराब की बिक्री होती है और इसका हिस्सा भी सब में बंटता है, ऊपर से लेकर नीचे तक | ट्रक के ट्रक गुजरात भेजे जाते हैं | उन्होंने कहा जयस पहले दिन से शराबबंदी के पक्ष में है और पूरे प्रदेश में शराबबंदी होनी चाहिए| उन्होंने शराब आदिवासियों के जीवन बर्बाद कर रहा है| एक आदिवासी अगर 200 रुपए कमाता है तो सौ रुपए शराब में चला जायेगा तो वह अपना घर कैसे चलाएगा| उन्होंने कहा महुए की शराब का प्रश्न है तो वह उसकी संस्कृति है, अगर शादी आदि कार्यक्रम में कम मात्रा में महुए की शराब आदिवासी बनाते हैं और रिश्तेदारों में बांटते हैं तो इसमें कोई बुराई नहीं, क्यूंकि यह उनकी संस्कृति का हिस्सा है| लेकिन जिस तरह यह क्षेत्र अंग्रेजी शराब का गढ़ बन रहा है यह गलत है,  प्रदेश में शराब माफिया की जड़ काफी मजबूत है और उनसे टकराने की यह शुरुआत है| इसके खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं और आगे भी लड़ाई जारी रहेगी|