मंत्रियों और सांसद के नाम से फर्जीवाड़ा , ज्यादातर मामले ट्रांसफर से जुड़े, क्राइम ब्रांच जुटी जाँच में

भोपाल ,हरप्रीत कौर रीन। मध्य प्रदेश में मंत्रियों और सांसद के नाम पर फर्जीवाड़ा जारी है, एक के बाद एक मामले सामने आ रहे है। पहले मंत्रियों के नाम से और फिर सांसद प्रज्ञा ठाकुर के नाम से फर्जी अनुशंसा का मामला सामने आया है, हाल ही में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री निवास में चिट्ठी लिखकर ट्रांसफर की फर्जी नोटशीट में भोपाल सांसद के असली साइन और लेटर की कॉपी कर अनुशंसा कर दी गई। मैटर जिस लेटर पर लिखा गया वह भी फर्जी था। मुख्यमंत्री निवास में यह फर्जीवाड़ा पकड़ा गया।

मामला सामने आने के बाद सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने दिल्ली में होने के चलते क्राइम ब्रांच के अधिकारियों से फोन पर इस संबंध में बात की है। इस मामले में विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों के मिलीभगत होने की आशंका बढ़ गई है। पत्र मे लिखने में हुई गलतियों से पूरा फर्जीवाड़ा सामने आया इसमें भाषा के तौर पर कई तरह की गलतियां हैं। पत्र में निवेदन की जगह सीधे आदेश कर दिए गया।

इस मामले में सांसद खुद हैरान है, उनका कहना है की रोजाना लोग उनसे मिलने आते है और अपनी समस्या बताते है, जिसके बाद उनके यहाँ से  कई जरूरतमंदों को अनुशंसा पत्र दिए जाते हैं, ताकि उनकी मदद की जा सके। सांसद ने साफ कर दिया कि मुख्यमंत्री निवास तक पहुंचा उनका अनुशंसा पत्र फर्जी है। इस तरह का लेटर उनके ऑफिस से जारी ही नहीं किया गया। उनके यहां इस पत्र की कोई एंट्री नहीं है। साथ ही उनके  द्वारा जारी लेटर के बाद एंट्री रजिस्टर में भी उनके साइन होते हैं। यह लेटर सीधे विभाग को नहीं भेजे जाते हैं। यह संबंधित मंत्री को भेजा जाता है। वहां से इसका कन्फर्मेशन भी आता है। इसमें ऐसा कुछ नहीं हुआ। साथ ही लेटर में यह लिखा जाता है कि नियम और प्रक्रिया के आधार पर ही किया जाए।

इस पूरे मामले में आशंका जताई जा रही है कि आरोपी ने सांसद के नाम से किसी को जारी अनुशंसा पत्र की कॉपी को स्कैन किया होगा। इसके बाद उसने साइन और लैटर हेड के बीच में मैटर बदल दिया होगा । फिलहाल मंत्री भूपेन्द्र सिंह ,मंत्री इंदर सिंह परमार, सहित कई और मंत्रियों और अब सांसद के नाम से फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद क्राइम ब्रांच इस मामले में आरोपियों की तलाश मे जुट गई है।