शिवराज बोले-अध्यक्ष को सदस्यता रद्द करने का अधिकार नही, मामला कोर्ट लेकर जाएंगे

भोपाल

भाजपा विधायक प्रहलाद लोधी की सदस्यता खत्म होने के बाद सियासत गर्मा गई है। एक तरफ सत्ता पक्ष कांग्रेस गदगद हो रही है और बड़े बड़े दावे कर रही है। वही दूसरी तरफ बीजेपी में उथलपुथल मची हुई है। दोनों दलों के बीच बयानबाजी का दौर तेजी से चल रहा है। अब पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का बड़ा बयान सामने आया है।शिवराज का कहना है कि एक दल को राजनीतिक लाभ पहुंचाने के लिए  यहकार्रवाई की गई है।इतनी जल्दबाजी में क्यों फैसला लिया गया ।हम मामले को न्यायालय में लेकर जाएंगे, हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।

प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि  प्रह्ललाद लोधी को इतना तो अवसर मिलना चाहिए था कि हाई कोर्ट में अपील कर सकें।  विधानसभा सचिवालय का आदेश दिखाकर कहा ​कि संविधान की धारा 191 के तहत प्रह्लाद लोधी निरहित हो गए हैं। लेकिन विधानसभा से सदस्यता रद्द करने का अधिकार विधानसभा अध्यक्ष को नहीं है। इसका अधिकार राज्यपाल को है।

शिवराज ने सवाल करते हुए कहा कि कांग्रेस की प्रह्लाद लोधी मामले में कार्रवाई करने की जल्दी क्या थी? फ़ैसले के विरुद्ध लोधी को हाईकोर्ट में अपील करने का अधिकार है। विधानसभा स्पीकर विधायकों के संरक्षक होते हैं। उनका निर्णय पहली ही नज़र में स्पष्ट कर रहा है कि एक पार्टी विशेष को लाभ पहुँचाने के लिए इस तरह का फ़ैसला लिया गया है। प्रह्लाद लोधी के पास उच्च न्यायालय जाने का मौका है, हम इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय जाएंगे।

वर्तमान सदन की तस्वीर

 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी के बीजेपी 109 विधायक थे। झाबुआ उपचुनाव में हार और लोधी की सदस्यता समाप्त होने के बाद अब उसके 107 विधायक बचे हैं।वही झाबुआ चुनाव जीने के बाद कांग्रेस पार्टी ने 115 विधायकों के साथ बहुमत को छुआ था। अब पवई सीट रिक्त होने से विधानसभा सदस्यों की संख्या घटकर 229 हो गई है। ऐसे में कांग्रेस अब पूर्ण बहुमत में है।

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