भोपाल। जेएनयू में विद्यार्थियों, शिक्षकों पर हुए हमले और दिल्ली पुलिस की संदेहास्पद सुस्ती के ख़िलाफ़ शहर के तमाम आम नागरिकों, कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों, कलाकारों, लेखकों, कवियों आदि ने बोर्ड ऑफिस पर प्रदर्शन किया। कश्मीर मसले पर IAS से इस्तीफा देने वाले कन्नन गोपीनाथन भी प्रदर्शन में शामिल हुए। जॉइन्ट एक्शन कमेटी के तहत इस प्रदर्शन में विभिन्न संगठनों के सदस्य भी शामिल हुए। 

प्रदर्शन करने वालों ने कहा कि जामिया, अलीगढ़ के बाद अब जिस तरह जेएनयू के विद्यार्थियों व शिक्षकों पर हथियारबन्द हमला हुआ है उससे केन्द्र की मोदी सरकार और भाजपा-संघ परिवार का हिंसक चेहरा बेनकाब हो चुका है। लोगों ने कहा कि रोज़गार, तालीम, अर्थव्यवस्था आदि तमाम मोर्चों पर असफल मोदी सरकार को CAA-NPR-NRC पर जिस अभूतपूर्व और व्यापक विरोध का पूरे देश में सामना करना पड़ रहा है उससे वह बौखला गई है। जेनएनयू पर हमला इसी बौखलाहट का नतीजा है।

जॉइन्ट एक्शन कमेटी के सदस्य एनुल यकीन ने कहा कि जेएनयू के छात्रोंं पर एबीवीपी के सदस्यों द्वारा हमला करवाया गया है। वहीं, लंबे समय से केंद्र सरकार की शह पर जेएनयू में छात्रों पर अत्याचार किया जा रहा है। पूर्व में भी फीस घटाने को लेकर हो रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शन को कुचलने की कोशिश की थी। और रविवार की घटना से ये साबित हो गया है कि यह सब किसकी शह पर हो रहा है। 

गौरतलब है कि जेएनयू के विद्यार्थी वहाँ फीस में की गई भारी बढ़ोतरी के खिलाफ़ लम्बे समय से आन्दोलनरत हैं। सरकार विद्यार्थियों की जायज़ माँगों को मानने की बजाय उन पर हमले करवा रही है। यह भी साफ हो गया है कि इन हमलों के पीछे लोगों के बीच डर का माहौल बनाने की एक सोची-समझी साजिश है। सरकार असल में उसके जन-विरोधी कामकाज व नीतियों के खिलाफ़ लोगों के प्रतिरोध को दबाने के लिए इस तरह की शर्मनाक हरकतें कर रही है।