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भोपाल।

भोपाल लोकसभा सीट एक हाईप्रोफाइल सीट मानी जाती है। इस सीट पर सालों से भाजपा का कब्जा है। विधानसभा चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस का फोकस लोकसभा चुनाव पर है। खास कर उन सीटों पर जिन पर वह कभी जीत नही पाई या फिर जीतते जीतते हार गई। इसके लिए कांग्रेस ऐसे दावेदारों की तलाश कर रही है जो भाजपा का किला सीधा भेद सके। चुनाव में कांग्रेस में दावेदारों की लाइन लगना शुरु हो गई है। इसी बीच पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के बेटे अनिल शास्त्री राजधानी भोपाल  से लोकसभा चुनाव लड़ने की दावेदारी पेश की है।वही बीजेपी से भी उन्हें ऑफर दिया गया है। फिलहाल दोनों दलों में सीटों को लेकर मंथन चल रहा है। अब ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा कि शास्त्री कहां से चुनाव लड़ेंगें।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के बेटे अनिल शास्त्री ने मध्यप्रदेश से कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है।  अनिल शास्त्री भोपाल लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहते हैं।  शास्त्री का नाम इसके पहले भी लोकसभा चुनाव के संभावित प्रत्याशी के रूप में भोपाल से चल चुका है। वहीं, दूसरी तरफ यह भी कहा जा रहा है कि भाजपा के भी कई नेताओं ने अनिल शास्त्री से संपर्क किया है और उन्हें टिकट का ऑफर से दे रहे है। लेकिन शास्त्री ने स्पष्ट कर दिया है कि वे कांग्रेस में हैं और कांग्रेस में ही रहेंगे। पार्टी मध्यप्रदेश की जिस सीट से चुनाव लड़ने के लिए कहेगी वे वहां से चुनाव लड़ेंगे।अनिल शास्त्री का जन्म उत्तर प्रदेश के लखनऊ में हुआ है। अनिल शास्त्री 1989 में वाराणसी लोकसभा सीट से कांग्रेस सांसद रह चुके हैं और केन्द्र सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं।

दरअसल, भोपाल सीट पर लगातार तीन दशक से भाजपा ही जीत रही है। यह सीट अब भाजपा का गढ़ बन चुकी है। इस सीट से पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती और कैलाश जोशी भी सांसद रह चुके हैं। वर्तमान में यहां से आलोक संजर भाजपा सांसद है। कांग्रेस इस बार लोकसभा के लिए किसी बड़े चेहरे की तलाश कर रही है जो भाजपा को कड़ी टक्कर दे सके।हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय का नाम इस सीट से चर्चा मे चल रहा है। ऐसे में शास्त्री ने भी इस सीट से दावेदारी पेश की है। खैर ये तो पार्टी को ही निर्धारित करना है कि वह किसे सीट देना चाहती है और किसे नही।

कांग्रेस में मंथन का दौर जारी

इधर, कांग्रेस में लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस पार्टी में लगातार बैठक हो रही हैं।अब तक कुछ सीटों पर सिंगल नाम और कुछ पर पैनल बना है। 11 मार्च को केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक होना है।उम्मीद जताई जा रही है कि पार्टी इस दिन अपनी पहली लिस्ट जारी कर सकती है। जिसमें   गुना-शिवपुरी से सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया , रतलाम से कांतिलाल भूरिया ,छिंदवाड़ा से सीएम कमलनाथ के पुत्र नकुल नाथ, खंडवा से अरुण यादव और सतना से अजय सिंह के नाम की घोषणा हो सकती है। माना जा रहा है कि इस बार के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की पत्नी प्रियदर्शनी राजे को ग्वालियर संसदीय सीट से चुनाव लड़ सकती हैं। उनका नाम इन दिनों चर्चाओं में चल रहा है और पैनल में भी उनके नाम को आगे बढ़ाया गया है। हालांकि प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया का साफ कहना है कि इसका फैसला सिंधिया ही करेंगें। यह उनके परिवार का मामला है, फैसला सिंधिया को ही लेना है।

ऐसा रहा है इस सीट का इतिहास

आजादी के बाद भोपाल में लोकसभा की दो सीटें थी, रायसेन और सीहोर. तब सीहोर सीट से कांग्रेस के सैयद उल्लाह राजमी ने उद्धवदास मेहता को हराया था, जबकि रायसेन सीट से कांग्रेस के चतुरनारायण मालवीय ने निर्दलीय उम्मीदवार शंकर सिंह ठाकुर को शिकस्त दी थी। इसके बाद 1957 में दोनों सीटों को मिलाकर एक भोपाल लोकसभा सीट हो गई। वर्ष 1957 में हुए लोकसभा चुनाव में मैमूना सुल्तान ने कांग्रेस का प्रतिनिधित्व किया और उन्होंने हिंदू महासभा के हरदयाल देवगांव को शिकस्त देकर सांसद बनी। इसके बाद उन्होंने 1962 के लोकसभा चुनाव में भी लगातार दूसरी बार हिंदू महासभा के ओमप्रकाश को हराया और सांसद चुनी गईं, लेकिन 1967 के लोकसभा चुनाव में भोपाल सीट पर कांग्रेस को पहली बार हार का सामना करना पड़ा। भारतीय जनसंघ के जेआर जोशी ने कांग्रेस उम्मीदवार मैमूना सुल्तान को तीसरी जीत हासिल करने से रोका और पहली भोपाल सीट पर पहली भार गैर कांग्रेस दल का कब्जा हुआ।हर साल से सबक लेते हुए कांग्रेस ने अगले ही चुनाव में साल 1971 में भोपाल सीट से देश के पूर्व राष्ट्रपति शंकरदयाल शर्मा को अपना उम्मीदवार बनाया और भारतीय जनसंघ के उम्मीदवार उनके सामने टीक नहीं सके। शंकरदयाल शर्मा ने शानदार जीत दर्ज कराते हुए 1971 में कांग्रेस की वापसी कराई, लेकिन आपातल के चलते अगले चुनाव में कांग्रेस को देशभर में करारी हार का सामना करना पड़ा और भोपाल सीट से 1977 में भारतीय लोकदल के उम्मीदवार आरिफ बेग ने शंकरदयाल शर्मा को हरा दिया। इसके बाद 1980 के लोकसभा चुनाव में फिर भोपाल सीट पर कांग्रेस ने पुन: कब्जा किया। इस बार शंकरदयाल शर्मा ने आरिफ बेग को बड़े अंतर से हराया। कांग्रेस ने इस जीत को 1984 के लोकसभा चुनाव में बनाए रखा।हालांकि, इस बार कांग्रेस ने केएन प्रधान को उम्मीदवार बनाया था और वे चुनाव जीतकर भोपाल सीट से सांसद बने, लेकिन इसके बाद भोपाल संसदीय सीट से कांग्रेस पूरी तरह गायब हो गई। भारतीय जनता पार्टी ने भोपाल सीट से 1989 के लोकसभा चुनाव में प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव रहे सुशीलचन्द्र वर्मा को मैदान में उतारा और उन्होंने कांग्रेस को ऐसी शिक्त दी कि वह यहां से फिर दोबारा उबर ही नहीं पाई। साल 1989 से 1998 तक चार बार लोकसभा के चुनाव हुए और सुशीलचन्द्र वर्मा ने चारों बार कांग्रेस को हराकर इस सीट पर भाजपा का कब्जा बरकरार रखा।इसके बाद 1999 में भाजपा नेत्री उमा भारती ने कांग्रेस के दिग्गज नेता सुरेश पचौरी को शिकस्त देकर भोपाल सीट पर भाजपा का कब्जा बनाए रखा। फिर, 2004 और 2009 में भाजपा के दिग्गज नेता कैलाश जोशी ने कांग्रेस उम्मीदवार सुरेन्द्र सिंह ठाकुर को हराया था। पिछले 2014 के लोकसभा चुनाव में यहां से आलोक संजर सांसद बने। इस चुनाव में भाजपा उम्मीदवार आलोक संजर ने कांग्रेस के प्रकाश मंगीलाल शर्मा को हराया। संजर को सात लाख 14 हजार 178 यानी 63.19 फीसदी वोट मिले थे, जबकि शर्मा को तीन लाख 43 हजार 482 यानी 30.39 फीसदी वोट मिले थे. भाजपा को पिछले चुनाव में तीन लाख 70 हजार 696 वोटों से जीत मिली थी।