बतख मियां अंसारी की जीवनी पर आधारित पुस्तिका का विमोचन

भोपाल। हिन्दुस्तान की तवारीख को तोड़-मरोड़कर पेश करने की जो गंदी सियासत देश पर छाई है, उसमें कई अफसोसनाक पहलू जुड़ते जा रहे हैं। देश को आजादी दिलाने में अपनी जान की आहूति देने वाले महात्मा गांधी के हत्यारे को पूजने वालों की तादाद यहां बढ़ती जा रही है। उसके लिए लोग मंदिर बनाने से लेकर महाग्रंथ लिखने तक को तैयार हैं और उसके लिए रातदिन बहस करने में भी मुब्तिला रहते हैं। इसके विपरीत जिन लोगों ने इस महान हस्ती को सुरक्षा देने की पहल की, उनकी जान बचाने के लिए अपने परिवार के लिए बड़े नुकसान का सबब बन गए, उनका नाम इतिहास के पन्नों में कहीं दर्ज नहीं है और न ही किसी मंच पर इनका जिक्र किया जाता है।

सामाजिक साहित्यिक, सांस्कृतिक संस्था शेरी अकादमी द्वारा आयोजित कार्यक्रम के दौरान रिटायर्ड डीजीपी एमडब्ल्यू अंसारी ने यह बात कही। इस मौके पर गांधी जी के प्राणरक्षक बतख मियां अंसारी नामक पुस्तिका का विमोचन भी किया गया। सैयद नसीर अहमद द्वारा लिखित इस पुस्तिका को हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी भाषाओं में प्रकाशित किया गया है। साथ ही इसका तेलगू संस्करण भी तैयार किया जा रहा है। अंसारी ने इस पुस्तिका के अंश बताते हुए कहा कि सन् 1917 में बतख मियां अंसारी ने चंपारन दौरे के दौरान गांधी जी की जान बचाई थी। उस दौरान एक आंदोलन के लिए चंपारन पहुंचे गांधी जी से अंग्रेज भयभीत थे, जिसके चलते उन्होंने गांधीजी की हत्या की योजना बनाई। इसके लिए उन्होंने बतख मियां को मोहरा बनाते हुए उन्हें प्रलोभन देने की कोशिश की और लालच में न आने पर उनपर दबाव भी बनाया कि वे गांधी जी के दूध में जहर मिलाकर पिला दें, जिससे उनकी जान चली जाए। ऐन वक्त पर बतख मियां अंसारी ने गांधी जी को दूध पीने से रोक दिया और उन्हें अंग्रेजों की साजिश की जानकारी देकर उनकी जान बचा ली। एमडब्ल्यु अंसारी ने कहा कि अपनी जान की बाजी लगाकर गांधीजी के प्राणों की रक्षा करने वाले बतख मियां का नाम इतिहास के पन्नों से मिटा दिया गया है। ऐसे में यह पुस्तिका देश के असल इतिहास को जानने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने बताया कि हिन्दुस्तान की पहली जंग-ए-आजादी के गुमनाम मुस्लिम मुजाहिदीन पर अधारित एक पुस्तक खून की किस्तें भी जल्दी ही प्रकाशित की जाने वाली है। इस पुस्तक के लेखक मकबूल वाजिद हैं। साथ ही वरिष्ठ पत्रकार लज्जाशंकर हरदेनिया की किताब एजेंडा आरएसएस का उसी की जुबानी का उर्दू और अंग्रेजी संस्करण भी जल्दी ही दिखाई देगा। इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार लज्जाशंकर हरदेनिया, विजय तिवारी, विनोद तिवारी आदि भी मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन मकबूल वाजिद ने किया।

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