सरकार का फैसला, स्वास्थ्य कारणों से चुनाव ड्यूटी रद्द कराने वालों की नहीं जायेगी नौकरी

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भोपाल|   लोकसभा चुनाव में मेडिकल सर्टिफिकेट के आधार पर चुनाव ड्यूटी निरस्त कराने वालों को नौकरी से बाहर करने के कलेक्टरों के फरमान को सरकार ने पलट दिया है| चुनाव ड्यूटी में स्वास्थ्य के आधार पर अनुपस्थित रहने वाले एक हजार से ज्यादा कर्मचारियों अधिकारियों पर अब कार्रवाई नहीं होगी| कर्मचारी संगठनों के विरोध के बाद सरकार ने यह फैसला किया है| सामान्य प्रशासन मंत्री गोविंद सिंह का इस सम्बन्ध में बयान सामने आया है| उन्होंने चुनाव ड्यूटी निरस्त कराने वालों को नौकरी से बाहर करने के निर्णय को गलत बताया है, उन्होंने कहा है कि ऐसे कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं होगी| 

दरअसल, लोकसभा चुनाव में सरकारी अधिकारी कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी| लेकिन प्रदेश भर में अनेकों अधिकारी कर्मचारियों ने खराब स्वास्थय का हवाला देते हुए मेडिकल सर्टिफिकेट लगाकर चुनाव ड्यूटी निरस्त करवाई थी| कलेक्टरों ने ऐसे अधिकारी कर्मचारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति के लिए सरकार को पत्र लिखे थे। भोपाल कलेक्टर सुदाम खाडे ने  ऐसे 14 अधिकारी-कर्मचारियों को सेवा से पृथक करने आठ विभागों के प्रमुखों को पत्र भेजे थे। जिसमें लिखा था कि सभी अधिकारी-कर्मचारी किसी न किसी बीमारी से पीडि़त होकर निर्वाचन ड्यूटी करने में असमर्थ हैं। इससे साबित होता है कि वे अन्य शासकीय कार्य भी करने में सक्षम नहीं हैं। कलेक्टर के इस पत्र से अधिकारी कर्मचारियों में हड़कंप मच गया |  

इसमें बताया गया कि सामान्य प्रशासन विभाग ने आठ नवंबर 2017 के पत्र में स्पष्ट कहा है कि 50 या 20 साल की सेवा पूरी करने वाले शासकीय सेवकों के अभिलेखों की छानबीन कर उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जा सकती है। कलेक्टर ने इस पत्र के आधार पर इन सभी अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ अनिवार्य सेवानिवृत्ति की कार्रवाई करने और इसकी जानकारी जिला निर्वाचन कार्यालय को देने के निर्देश दिए थे। भोपाल में लोकसभा चुनाव के दौरान आठ विभागों के 14 अधिकारियों की चुनाव ड्यूटी जिला निर्वाचन कार्यालय ने मेडीकल बोर्ड के प्रमाण पत्र के आधार पर मतदान से पहले निरस्त की थी। रिपोर्ट में इन अधिकारियों अनफिट पाया गया था। वहीं कलेक्टर के इस फरमान का कर्मचारी संगठन ने भी विरोध जताया था| कर्मचारी संघ ने सामान्य प्रशासन मंत्री से फैसला बदलने की मांग को लेकर मुलाक़ात की थी, जिसके बाद सरकार ने इस कार्रवाई पर रोक लगा दी है| सरकार के इस फैसले से ऐसे एक हजार से अधिक कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है|