तबादला ‘नीति’ से बाहर हैं ये अफसर, लंबे समय से एक ही जगह जमे

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भोपाल। मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार ने मुख्यमंत्री बनते ही सबसे पहले पुलिस विभाग के साथ बैठक की थी। इसमें उन्होंने कहा था कि लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे अफसरों के अब दिन लदने वाले हैं। उसके बाद से ही प्रदेश में तबादलोंं का दौर जारी है। सरकार ने सत्ता में आते ही ताबड़तोड़ तबादले किए। लेकिन अब भी कुछ अफसर ऐसे हैं जो सरकार की तबादला नीति से बाहर हैं। चाहें बीजेपी की पूर्व सरकार हो या फिर अब कांग्रेस की सरकार इन अफसरों को कोई नहीं हटा सका। 

तबादलों से जुड़ा एक तथ्य यह भी है कि आईएएस और आईपीएस अफसरों में कुछ ऐसे भी हैं, जिन्हें सरकार बदलने या किसी फार्मूले से कोई फर्क नहीं पड़ता है। इसमें प्रमुख सचिव स्तर के अफसर डॉ. राजेश राजौरा, मोहम्मद सुलेमान, जेएन कंसोटिया, हरिरंजन राव सहित अन्य अधिकारी शामिल हैं तो आईपीएस अफसरों की फेहरिस्त भी लंबी है। इसमें अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक पवन जैन, संजीव शमी और शैलेंद्र श्रीवास्तव के नाम प्रमुख हैं।

राज्य सरकार किसी भी अफसर को दो से तीन साल से ज्यादा समय एक स्थान पर नहीं रखती है। चाहें मैदानी अफसर हों या फिर मुख्यालय में पदस्थ। लेकिन लंबे समय से बीजेपी सरकार में एक ही स्थान पर जमे अफसरों को कांग्रेस सरकार भी नई जगह भेजने में नाकाम रही है। यह अधिकारी अपवाद हैं। प्रमुख सचिव कृषि डॉ. राजेश कुमार राजौरा शिवराज सरकार में भी कृषि विभाग का जिम्मा संभाल रहे थे और कमलनाथ सरकार में भी। वे सितंबर 2013 से लगातार इस पद पर हैं। इसी तरह मोहम्मद सुलेमान उद्योग विभाग में लंबे समय से हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग में जेएन कंसोटिया अगस्त 2014 से प्रमुख सचिव हैं। हरिरंजन राव भी पर्यटन विभाग से किसी ने किसी रूप में लंबे समय से जुड़े हुए हैं।

नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा में मनु श्रीवास्तव अप्रैल 2015 से हैं। उन्हें वाणिज्यिक कर विभाग की नई जिम्मेदारी तो दी गई है पर पुराने विभाग से छेड़छाड़ नहीं की गई। हाल ही में कमिश्नर बनाए गए आकाश त्रिपाठी इंदौर में लंबे समय से जमे हैें। वे यहां नगर निगम कमिश्नर और कलेक्टर रहे और अब कमिश्नर बनाए गए हैं।

इसके पहले विद्युत वितरण कंपनी का काम देख रहे थे। सामान्य प्रशासन विभाग में रश्मि अरुण शमी भी काफी समय से पदस्थ हैं। वे यहां सचिव थीं और अब प्रमुख सचिव बन गई हैं। सरकार बदलने से सिर्फ इतना परिवर्तन हुआ कि उन्हें स्कूल शिक्षा विभाग का प्रमुख सचिव बना दिया और सामान्य प्रशासन का काम अतिरिक्त तौर पर दिया गया।