नज़रिया : मुंबई से आया मेरा दोस्त, दोस्त को होम क्वारेंटाइन करो!

पलायन कर आ रहे लोग नहीं हो रहे होम क्वारेंटाइन, लापरवाही बन सकती है बड़ा खतरा

भोपाल डेस्क। जिस तरह से कोरोना अपने पैर पसार रहा है उससे साफ साबित होता है कि वायरस का नया स्ट्रेन न केवल खतरनाक बल्कि पावरफुल भी है। स्कूल, कॉलेज, सिनेमा, जिम पर एक बार फिर ताला जड़ गया है और प्रशासन वायरस की रोकथाम के लिए कर्फ्यू लगाने पर मजबूर है। प्रशासन का मानना है कि कर्फ्यू की मदद से संक्रमण की चेन को तोड़कर लोगों को बचाया जा सकता है। प्रशासन लोगों से मदद की बार बार गुहार भी कर रहा है और जिन जगहों पर स्थितियां भयावह हैं, वहां पर कड़े कदम भी उठा रहा है।

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हॉस्पिटल्स की स्थिति देखें तो मरीजों की संख्या ज्यादा है और बेड कम, जिसकी भरपाई  प्रशासन नए कोविड केयर सेंटर खोलकर कर रहा है। साथ ही लोगों को होम आइसोलेशन में दवाई और बाकी सुविधाएं देकर भी प्रशासन अपना फर्ज निभा रहा है। लेकिन कुछ लोग अभी भी परिस्थिति को नज़रंदाज़ कर प्रशासन की मदद करने की बजाए गैरजिम्मेदाराना रवैया अपना रहे हैं। कुछ लोग अपनी प्राइवेट गाड़ियों में ऐसे राज्य जहां कोरोना की स्थिति गंभीर है वहां से पलायन कर अपने होम टाउन तो आ ही रहे हैं और होम क्वारेंटाइन होने की बजाए बाजार में घूमते देख जा रहे हैं। उनका यह रवैया न केवल गैरजिम्मेदाराना बल्कि खतरनाक भी साबित हो सकता है।

सबसे बड़ी बात यह है की महामारी के इस चरम पर भी प्रशासन द्वारा पलायन कर रहे लोगों के लिए कोई विशेष आदेश पारित नहीं किया गया है, जैसा पिछली साल किया गया था। ऐसे लोगों को चिन्हित कर होम क्वारेंटाइन का आदेश और इसका उल्लंघन करने वाले के लिए कड़े प्रावधान होने चाहिए। इस समय किसी भी प्रकार की चूक प्रशासन के किए कराए पर ना केवल पानी बल्कि पूरी सैनेटाइजर की बॉटल फेर सकती है।