कभी थे 22 पार, अब 10 हजार पर सिमट रहे हज आवेदन, अर्जियों की तादाद बेहद कम

भोपाल। अकीदत के सफर की अर्जियों के लिए पाबंद की जा रहीं नई व्यवस्थाएं इसकी तादाद कम करने का सबब बन गया है। जहां अब तक यहां आवेदन 20-22 हजार पार हुआ करते थे, इस साल यह तादाद दस हजार के आसपास आकर ठिठक गई है। बचे हुए दिनों में इस आंकड़े में कुछ चमत्कारी इजाफा होने की उम्मीद भी नहीं की जा सकती। प्रदेश हज कमेटी इन हालात को देखते हुए आवेदन की आखिरी तारीख को आगे बढ़ाने के लिए सेंट्रल हज कमेटी से गुजारिश करने वाली है।

जानकारी के मुताबिक वर्ष 2017 में प्रदेश के अकीदतमंदों द्वारा हज अर्जियां जमा करने का आंकड़ा 22 हजार 117 पर था। जबकि वर्ष 2018 में इसकी तादाद 16 हजार 680 पर आ गई। वर्ष 2019 के लिए किए जा रहे आवेदनों ने पिछले सब आंकड़ों से गिरकर अपनी आमद महज 10 हजार 667 पर दर्ज कराई है। लगातार कम हो रहे हज अर्जियों के इस सिलसिले को आवेदन के लिए लागू किए गए नए नियमों को माना जा रहा है। इस बार आवेदन के लिए अपनाई जा रही ऑनलाइन प्रक्रिया ने कई ग्रामीण और अशिक्षित लोगों के लिए परेशानी खड़ी कर दी है। ऑनलाइन प्रक्रिया से नावाकिफ लोग किसी तरह फार्म पूरा करने के बाद ऑनलाइन पेमेंट को लेकर भी पसोपेश में नजर आ रहे हैं। हालांकि हज कमेटी इसकी तादाद बढ़ाने के कई प्रयास कर चुकी है, बावजूद आवेदन की आखिरी तारीख से महज एक सप्ताह पहले दर्ज की गई निराशाजनक अर्जियों को लेकर फिक्र के हालात बनने लगे हैं।

ताकि बढ़े अर्जियों की तादाद

प्रदेश हज कमेटी ने ऑनलाइन हज आवेदन के लिए हज कमेटी दफ्तर के अलावा करीब 5 जगह से अर्जियां करने की सुविधा उपलब्ध कराई है। इसमें लक्ष्मी टॉकीज सराय, हज कमेटी का सिटी दफ्तर, शाहजहांनाबाद में दो स्थानों साथ भोपाल स्टेशन आदि पर इसकी व्यवस्था है। इसके अलावा प्रदेशभर की जिला हज कमेटियां भी इस काम में सहयोग दे रही हैं।

बढ़ सकती है तारीख

हज आवेदन की पहले से निर्धारित तारीख तक आवेदनों की तारीख महज 6 हजार के आसपास थी। इस स्थिति को देखते हुए सेंट्रल हज कमेटी ने इस तारीख में इजाफा कर आखिरी तारीख 5 दिसंबर तक कर दी थी। लेकिन इस दौरान भी हज आवेदनों की तादाद माकूल नहीं हो पाई है। जिसके चलते प्रदेश हज कमेटी चि_ी लिखकर सेंट्रल हज कमेटी से तारीख बढ़ाने के लिए एक बार और गुजारिश करने वाली है। इस दौरान आवेदन के लिए 15 दिन और बढ़ाने की मांग की जाएगी।

खादिमों के लिए चुनिंदा विभाग ही क्यों

हज सफर के दौरान जाने वाले प्रदेश के हाजियों की खिदमत के लिए कमेटी की तरफ से सरकारी मुलाजिमों को खादिम-उल-हुज्जाज के तौर पर सउदी अरब भेजा जाता है। सरकार के अन्य महकमों के साथ मप्र वक्फ बोर्ड और हज कमेटी दफ्तर के कर्मचारियों को भी इस श्रेणी में मौका दिया जाता है। ऑल इंडिया उलेमा बोर्ड के अध्यक्ष काजी सैयद अनस अली नदवी ने मांग की है कि इस श्रेणी में भोपाल रियासत सहित प्रदेशभर की मस्जिदों के ईमाम-मोअज्जिनों के लिए रिजर्व कोटा रखकर खिदमत के लिए हज पर भेजे जाने का प्रावधान किया जाना चाहिए।  उन्होंने कहा कि बेहद कम तन्ख्वाह पर बारह महीनों, सातों दिनों, चौबीसों घंटे कौम की खिदमत करने वालों को यह मौका दिया जाए तो यह उनके लिए किसी तोहफे से कम नहीं होगा। काजी अनस ने अन्य मुस्लिम इदारों मप्र मदरसा बोर्ड, मप्र उर्दू अकादमी, राज्य अल्पसंख्यक आयोग आदि के कर्मचारियों को भी इस श्रेणी में हज पर भेजे जाने की मांग की है।

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