मॉडल मंडी एक्ट के विरोध में सड़कों पर उतरे सैंकड़ों कर्मचारी, अनिश्चितकालीन हड़ताल पर गए

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मॉडल मंडी एक्ट (model mandi act) के खिलाफ मंडी कर्मचारी-अधिकारी बेमियादी हड़ताल पर चले गए हैं। इस हड़ताल का लाखों हम्माल-तुलावली और व्यापारियों सहित किसानों ने भी समर्थन किया है। आज सैंकड़ों कर्मचारियों ने कर्मचारियों ने राजधानी में मंत्रालय पर विरोध प्रदर्शन किया। बता दें कि मॉडल एक्ट में संशोधन की मांग को लेकर मंडी कर्मचारियों का विरोध जारी है।

प्रदेश भर में 259 उपज मंडियां हैं, इन मंडियों का कार्यभार मंडी समिति संभालती है। मंडी प्रांगण के अंदर आने वाले माल को लाइसेंसधारियों और गल्ला से जो आय होती है उसी से मंडी समितियों में पदस्थ कर्मचारियों का वेतन बनता है। लेकिन अब मंडी एक्ट लागू होने से किसानों का माल सीधे बाजार में उतारा जा रहा है, जिसका विरोध लगातार मंडी समिति कर्मचारियों द्वारा किया जा रहा है।

सरकार द्वारा लाए जा रहे नए मॉडल एक्ट को लेकर संयुक्त संघर्ष मोर्चा मध्य प्रदेश मंडी बोर्ड में भारी नाराजगी है। इसे लेकर गुरुवार को संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले राजधानी भोपाल सहित पूरे प्रदेश भर के मंडी कर्मचारी ने कलम बंद हड़ताल कर सत्याग्रह करते हुए मंडी बोर्ड दफ्तर से मंत्रालय तक नारेबाजी करते हुए सामूहिक रैली निकाली। मंडी बोर्ड के कर्मचारी मांगों को लेकर वल्लभ भवन तक पहुंच गए थे। इन्हें विंध्याचल भवन के पास बैरिकेडिंग करके रोक दिया गया। इस मौके पर प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए अपना आक्रोश जताया और सरकार से नए मॉडल एक को वापस लेने की मांग की। साथ ही कर्मचारियों ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर नया मॉडल एक्ट वापस नहीं लिया गया तो आने वाले विधानसभा सत्र के दौरान वह विधानसभा का घेराव करेंगे। आज हो रहे सत्याग्रह से प्रदेश की करीब 259 मंडी, 298 उपमंडी सहित ही 7 आंचलिक कार्यालय व 13 तकनीकी संभाग प्रभावित हों रहे हैं।

कोरोना संकटकाल के बीच प्रस्तावित मॉडल एक्ट में संशोधन की मांग को लेकर मंडी कर्मचारियों ने विधानसभा सत्र के दौरान घेराव करने की चेतावनी दी है। आपको बता दें कि संयुक्त संघर्ष मोर्चा मध्य प्रदेश मंडी बोर्ड के बैनर तले सभी कर्मचारी 7 सूत्रीय मांगों को लेकर बीते कई दिनों से ज्ञापन सौंपकर मॉडल एक्ट में संशोधन की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करवा रहे हैं, मगर उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई है जिसके बाद अब उन्होने हड़ताल कर दी है।

प्रांतीय अध्यक्ष अंगिरा प्रसाद पांडे ने कहा कि मई 2020 से अगस्त तक विभिन्न पत्रों के माध्यम से सरकार के सामने उन्होंने अपनी मांगों को रखा है, मगर उनकी 7 सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार ने अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है। अंगिरा प्रसाद पांडे ने कहा कि अनेक विसंगतियां मॉडल एक्ट में रखी गई है, उपरोक्त एक्ट में कर्मचारी संघ की सहभागिता तथा प्रभावित वर्ग की अनुशंसा इत्यादि नहीं ली जाकर एक तरफ अधिकारी वर्ग द्वारा मॉडल एक्ट को प्रस्तावित किया जाकर शासन को भ्रमित कर मंडी अधिनियम का सत्यानाश किया जा रहा है।

संयुक्त संघर्ष मोर्चा के मुताबिक मध्यप्रदेश शासन द्वारा 1 मई को मॉडल एक्टर एक्ट लागू करने का अध्यादेश जारी किया गया लेकिन उसके नियम व दिशा निर्देश वर्तमान तक जारी नहीं हुए अर्थात उपरोक्त एक्ट वर्तमान में क्रियाशील नहीं है। केंद्र शासन द्वारा 5 जून 2020 से कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य अध्यादेश जारी किया गया किंतु राज्य शासन द्वारा अध्यादेश को अंगीकृत करने के संबंध में भी स्पष्ट नियम व दिशा निर्देश जारी नहीं किए गए।

 

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