संकटकाल में निजी अस्पताल न खुले, तो लाइसेंस होगा निरस्त

भोपाल| मध्य प्रदेश में कोरोना के खिलाफ जंग जारी है| इस संकटकाल में निजी अस्पतालों को बंद करना संचालकों को महंगा पड़ सकता है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि यदि कोई निजी चिकित्सालय न खुले, तो उसका लाइसेंस निरस्त करें| सीएम मंत्रालय में मंत्रियों एवं वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्रदेश में कोरोना की स्थिति एवं व्यवस्थाओं की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा कर रहे थे।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि यदि कोई निजी चिकित्सालय न खुले, तो उसका लायसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की जाए। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि कलेक्टर एक टीम बनाकर दि‍खवाएं कि निजी चिकित्सालय खुल रहे हैं कि नहीं। सीएम ने कहा प्रदेश में भोपाल सहित अन्य जिलों में कोरोना की स्थिति में सुधार हो रहा है। बड़ी संख्या में मरीज ठीक होकर घर जा रहे हैं। कई जिले संक्रमण मुक्त हो रहे हैं तथा संक्रमण की गति धीमी हो रही है। शिवपुरी एवं छिंदवाड़ा जिलों में पिछले 16 दिनों से कोई भी कोरोना मरीज पॉजीटिव नहीं पाया गया है। विदिशा जिले में पिछले 11- 12 दिनों से कोई प्रकरण पॉजीटिव नहीं आया है।

989 में से 14 प्रकरण पॉजीटिव
भोपाल की स्थिति के विषय में बताया गया कि गत दिन में भोपाल के 989 कोरोना टैस्ट में से 14 प्रकरण ही पॉजीटिव पाए गए। अब प्रोफेसर कॉलोनी क्षेत्र पूंर्णत: संक्रमण मुक्त हो गया है। श्री चौहान ने क्वारेंटाइन क्षेत्रों में अच्छी व्यवस्था किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वहां सोशल डिस्टेंसिंग हो तथा भोजन आदि की अच्छी व्यवस्थाएँ सुनिश्चित हों।

जिनके सैम्पल लिए गए हैं, वे कहीं नहीं जाएं
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जिन व्यक्तियों के कोरोना टेस्ट के सैम्पल लिए गए हैं, वे कहीं नहीं जाएं। वे क्वारेंटाइन में ही रहें। यदि वे कहीं जाएंगे, तो उनके विरूद्ध कार्रवाई की जाएगी।

अब हमारी टेस्टिंग क्षमता 2000 प्रतिदिन
अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य मोहम्मद सुलेमान ने बताया कि प्रदेश में कोरोना टेस्टिंग के लिए 12 लैब चालू हो गए हैं। अब हमारी टेस्टिंग क्षमता 2000 प्रतिदिन हो गई है। हमारे पास पीपीई किट्स, टैस्टिंग किट्स, मास्क, दवाएं आदि पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। भारत शासन से हमें पर्याप्त सामग्री मिल रही है।