जीतू पटवारी का बड़ा बयान-अतिथि विद्वानों को मिलेगा हक, जल्द भरेंगें कॉलेजों में खाली पड़े पद

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भोपाल।

आज 17 जून को कमलनाथ ने बतौर मुख्यमंत्री 6 महीने पूरे कर लिए है।मुख्यमंत्री के 6 महीने के कार्यकाल को भुनाने के लिए कांग्रेस सरकार के मंत्री और सीनियर नेता पूरे प्रदेश में जनता के बीच जाकर मीडिया के माध्यम से रिपोर्ट कार्ड पेश कर रहे है।इसी कड़ी में आज राजधानी भोपाल में उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने पत्रकारवार्ता कर जनता के सामने कमलनाथ सरकार के 6 महीने का ब्यौरा रखा। इस दौरान जीतू ने कहा कि  अतिथि विद्वानों को उनका हक देंगे। कॉलेजो में खाली पड़े सभी पद जल्द भरे जाएंगे। पीएससी से चयनित असिस्टेंड प्रोफेसर की भर्ती में चयनित उम्मीदवारों को लेकर कोर्ट में सरकार सकारात्मक पक्ष रखेगी, उनके साथ अन्याय नही होगा।

जीतू ने कहा कि हमारी सरकार के 6 महीने पूरे हो गए है। मप्र गठन से लेकर आज तक कोई भी मुख्यमंत्री रहे हो चाहे कांग्रेस के भी क्यो न रहे हो उनके कार्यकाल से ज्यादा उपलब्धि इन 6 महीने में कमलनाथ सरकार ने काम करके दिखाई है। जय किसान ऋण योजना के जरिये किसानों का कर्ज माफ हुआ है। इस एक योजना से दो लाभ दिए गए है पहला लाभ कोऑपरेटिव सेक्टर की बैंक को इस योजना से मजबूत किया है और दूसरा किसानों का कर्ज माफ हुआ। जीत ने कहा कि  जहाँ से बीजेपी की सोच खत्म होती है, वहां से कमलनाथ की सोच शुरू होती है। पहले स्कूल चले अभियान मप्र में चलता था लेकिन अब पहली बार कॉलेज चलो अभियान हमने शुरू किया है। मप्र की सरकार विपक्ष को साथ लेकर सकारात्मक तरीके से काम करना चाहती है।

बेटियों के फ्री एडमिशन करने वाला एमपी पहला राज्य

जीतू ने कहा कि कमलनाथ सरकार ने इन छह महिनों में वृद्धावस्था पेंशन योजना से लाभ दिया। मुख्यमंत्री कन्यादान योजना की राशि बढ़ाई। किसानों के लिए 6 महीने में बहुत काम किया है। उच्च शिक्षा विभाग ने बेटियों को कॉलेज तक भेजने के लिए फ्री में एडमिशन करने की घोषणा की है। मप्र ऐसा करने वाला पहला राज्य है। 50 रु शुल्क देकर लड़के अपना पंजीयन एमपी आन लाइन में करवा सकता है और एडमिशन के लिए।

डॉक्टरों की हड़ताल पर बोले

वही डॉक्टर्स के आंदोलन को जीतू पटवारी ने राजनीति से प्रेरित बताया। पश्चिम बंगाल में हुए घटना की निंदा की और कहा कि केंद्र की राजनीति से केंद्रीत होकर इस तरह का आंदोलन होना गलत है। मप्र में डॉक्टरों की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है। केंद्र की राजनीति से प्रेरित होकर इस तरह की हड़ताल को मैं जायज नहीं मानता हूं । जो लोग दूसरों की जान को बचाने का काम करते हैं उनकी जान-माल की रक्षा करना हमारा दायित्व है।