विदेशों से आए जमातियों ने कहा: इज्तिमा समाज में फैली बुराईयों को दूर करने का है माध्यम

भोपाल। 

इज्तिमा घूमने-फिरने या पिकनिक मनाने की जगह नहीं है, बल्कि हम यहां पर शिक्षा ग्रहण करने और हमारे पास जो भी है उसे लोगों को बताने के लिए आए हैं। ताकि समाज में फैली बुराईयों को दूर किया जा सकें और सभी अल्लाह और उनके रसूल के बताए हुए रास्ते पर चल कर इंसानियत का पैगाम दुनियां में फैला सकें। हम यहां पर सामूहिक रूप से विश्व में एकता-अखंडता और शांति-सद्भाव बनाने रखने के लिए दुआ के लिए आते है। यह बात भोपाल  से 15 किलोमीटर दूर ईंटखेड़ी में आयोजित विश्व के दूसरे सबसे बड़े आलमी तब्लीगी इज्तिमा में आए जमातियों का कहना है। वहीं विदेशों से आए जमातियों का कहना है कि हम यहां इंसानियत और आपसी भाई चारे का पैगाम लेकर आए है। हम यहां पर स्टूडेंट बनकर आए हैं और अल्लाह के रसूल के बताए गए रास्तों पर चलने की कोशिश कर रहे हैं। 

वहीं इज्तिमा के तीसरे दिन आज सुबह फजिर की नमाज में मौलाना युसूफ साहब ने बयान पेश किया। उन्होंने अपने बयान में नमाज कायम करने पर जोर दिया। वहीं उन्होंने अपने बयान में जकात अदा करने और अल्लाह के बंदों से हराम कमाई और ब्याज खोरी से दूर रहने की सलाह दी। इसके बाद मौलाना शौकत साहब ने ईमान और अख्लाख पर बयान पेश किया। उन्होंने अपने बयान में लोगों को असल जिंदगी का मकसद अल्लाह और उसके रसूल के बताए हुए रास्ते पर चलने व भलाई के काम करते रहने की हिदायत दी। 

वहीं इज्तिमा स्थल पर वुजू के लिए 19 हजार मीटर की पाइप लाइन बिछाई है। वहीं वुजू के लिए पाक और साफ 500 वॉट स्टोरेज टैंक में पानी की व्यवस्था की गई है। तो पहली बार वुजू के लिए 16 हजार नलों की व्यवस्था है। इसके अलावा स्वच्छता व्यवस्था के लिए इज्तिमा स्थल पर 2 हजार नगर निगम के सफाईकर्मी तैनात है। साथ ही साफ-सफाई में निगमकर्मियों का 2200 से ज्यादा स्वच्छता मित्र सहयोग कर रहे हैं।  इज्तिमा के आए जमातियों को इस बार करीब 84 से ज्यादा उलेमा दीन का पैगाम अपने बयान से दे रहे हैं। 

झलकियां

– रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और भोपाल टॉकीज चौराहे से जमातों को इज्तिमागाह तक पहुंचाने के लिए वाहनों का इंतजाम किया गया है।

– सारे रास्ते यातायात की व्यवस्था वॉलेंटियर्स ने संभाल रखी है।

– इज्तिमागाह पर अजान होते ही जमाती नमाज की तैयारी में जुट जाते हैं। नमाज शुरु होने पर यहां पूरी तरह सन्नाटा पसर जाता है। 

– इज्तिमागाह पर लगे चिकित्सा शिविरों में सबसे ज्यादा भीड़ यूनानी शिफाखाने के कैंप पर दिखाई दे रही है। यहां सर्दी-जुकाम के लिए जुशान्दा पीने के लिए कतारें लग रही हैं।

– इज्तिमा में स्थानीय लोग भी बड़ी तादाद में पहुंच चुके हैं, जिसके चलते शहर के अधिकांश मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों और बाजारों में सन्नाटे के हालात दिखाई दे रहे हैं।

– जमातों में पहुंचने वालों में कई ऐसे बुजुर्ग हैं, जो बरसों से यहां आ रहे हैं तो कुछ ऐसे लोग भी शामिल हैं, जिन्होंनें पहली बार इस समागम का रुख किया है। वहीं पहली बार आए सरवर और अहमद के लिए यह समागम कई जिज्ञासाओं भरा दिखाई दे रहा है। इज्तिमा में 30 साल से लगातार आ रहे हाजी इनायत हुसैन और मोहम्मद अफजल शेख खुश दिखाई दे रहे थे कि उनका मामूल बरकरार है। 

तकरीरों में छह बिंदुओं 

इज्तिमा के दौरान होने वाली तकरीरों और बयान सिर्फ छह बिंदुओं पर केंद्रित है। इनमें ईमान, नमाज, इल्म और जिक्र, इख्लास-ए-नियत और अच्छी बातों के लिए लोगों को बुलाना शामिल है। पिछले 71 बरस से इन्हीं छह बिंदुओं पर उलेमाओं की बात हो रही है। इस साल करीब 84 से ज्यादा उलेमाओं की बात भी इन्हीं छह बिंदुओं पर हो रही है। आज सुबह फजिर में मौलाना युसूफ साहब और मौलाना शौकत साहब की तकरीरें भी इन्हीं छह बिंदुओं पर केंद्रित रहीं। 

अच्छे और गलत का फर्क बताता है इज्तिमा

सालभर में एक बार यहां आने का मौका मिलता है। यहां खुदा के बंदों की बातें सुनकर उन्हें अपने अंदर उतारते हैं, तो दिली रूप से बहुत सुकून मिलता है। यह इज्तिमा एक ऐसा माध्यम है जो हमें अच्छे और गलत कामों में फर्क बताता है।

– मौलाना अजमेरी, जमाती सउदी अरब

व्यवस्थाएं इतनी अच्छी कि कहीं भी नहीं पड़ता भटकना

मैं इस इज्तिमे में 1975 से आ रहा हूं। यहां की व्यवस्थाएं इतनी अच्छी हैं कि कहीं भी भटकना ही नहीं पड़ता। चूंकि हमें एक साल पहले ही मालूम रहता है कि कब इज्तिमा लगेगा। इसलिए आने में दिक्कत नहीं होती। यहां आने के बाद उलेमाओं द्वारा हमें धर्म, शिक्षा के ज्ञान के साथ कुरीतियों को खत्म करने की बातें बताई जाती हैं।

– मो. जुबेर, जमाती इंडोनेशिया

हम धर्म प्रचार करने आए हैं

तब्लीग के मायने प्रचार के हैं और यहां इस शब्द को ‘धर्म प्रचारÓ के मायने में इस्तेमाल किया जाता है। इस तरह तब्लीगी इज्तिमा में ऐसे लोगों का जमावड़ा होता है जो धर्म के प्रचार के लिए निकले हैं। सो इज्तिमा में तब्लीगी जमात की जमातों के साथ आम मुसलमान भी शामिल होते हैं।

– मौलाना हाफिज, जमाती कुवैत

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