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भोपाल। लोकसभा चुनाव से पहले बिजली कटौती को लेकर सरकार की सख्त कार्रवाई जा रही है| बीते तीन दिनों में सरकार द्वारा 387 अधिकारी और कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है, जिसमें से 217 को नौकरी से निकाला गया है और 142 को सस्पेंड कर दिया गया है। वही लापरवाही बरतने वाले 28 कर्मचारियों को नोटिस थमाए गए है।सरकार की इस तबाड़तोड़ कार्रवाई के बाद अधिकारियों-कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है। वहीं इस कार्रवाई पर सवाल भी उठ रहे हैं| 

दरअसल, लोकसभा चुनाव से पहले बिजली कटौती बड़ा मुद्दा बना हुआ है। विपक्ष लगातार इसे ढा़ल बनाकर राज्य सरकार का घेराव करने लगी थी, जिसके बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बिजली कंपनियों औ ऊर्जा मंत्री और विभाग से इस बारे में एक महिने के अंदर रिपोर्ट मांगी। ऊर्जा मंत्री ने अपनी रिपोर्ट में इसके पीछे बीजेपी का षड़यंत्र बताया। जिसके बाद राज्य सरकार की तरफ से मुख्य सचिव एसआर मोहंती ने प्रदेश के सभी जिले के कलेक्टरों को बिजली के मामले में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। जिसके बाद 387  अधिकारी-कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई।मुख्य सचिव मोहंती ने सभी कलेक्टर को ये भी निर्देश दिए कि बिजली को गंभीरता से लें। यह सुनिश्चित किया जाये कि विद्युत आपूर्ति की वजह से पेयजल आपूर्ति प्रभावित न हो। 

जानकारी के मुताबिक आगर-मालवा, राजगढ़, आष्टा , शाजापुर, हरदा, सीधी, खंडवा, बालाघाट, छिंवाड़ा, खंडवा सहित कई अन्य जिलों से लोगों ने अघोषित बिजली कटौती की शिकायत की थी। इसके बाद हरकत में आए प्रशासन ने मामले को संज्ञान में लिया और जांच कराई। ऐसे में पता चला कि कई कर्मचारी जानबूझ कर काम नहीं कर रहे हैं, कई कर्मचारियों अधिकारियों पर तो बीजेपी के पक्ष में काम करने का भी आरोप लगा है। जिसके बाद प्रशासन ने लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई की है। कार्रवाई में 217 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया है जबकि 142 कर्मचारियों को निलंबित किया गया है वही  लापरवाही बरतने वाले 28 कर्मचारियों को नोटिस दिया गया है।

सरकार ने रविवार को इसी मामले में होशंगाबाद-हरदा जिले के 5 लाइनमैन और 9 आउटसोर्स कर्मचारियों पर कार्रवाई की। बिजली कंपनी के सहायक प्रबंधक गौरव चावड़ा ने शिवपुर (होशंगाबाद) पुलिस थाने में शिकायत की है कि 20 अप्रैल की रात कजली क्षेत्र में रात 8 बजे गोविंद नामक किसान ने लाइन पर तार डालकर फॉल्ट पैदा किया। इसकी वजह से भैंसादेह में आधा घंटे बिजली गुल रही। वही खंडवा जिले में भी बिजली कटौती के कारण सहायक यंत्री, सर्कल इंचार्ज, परीक्षण सहायक और चार लाइनमैन को निलंबित किया गया है। साथ ही आठ आउटसोर्स कर्मियों को भी नौकरी से निकाल दिया गया है। 

सीधे हो एफआईआर दर्ज-मुख्य सचिव 

चुनाव आचार संहिता के बाद भी सरकार पूरी तरह से एक्शन मोड पर है। मुख्य सचिव एसआर मोहंती ने शनिवार को कलेक्टरों से कहा कि बिजली सप्लाई में गड़बड़ी करने वालों पर सीधे एफआईआर दर्ज करो। सीएस मोहंती बिजली, पानी और अनाज उपर्जन व्यवस्थाओं की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बिजली सरप्लस है, इसके बाद भी कई क्षेत्रों में कटौती क्यों की जा रही है।

मंत्री की दो टूक बिजली कटौती से ना हो सरकार की बदनामी

खेल और उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी शनिवार दोपहर इंदाैर में बिजली कंपनी के मुख्यालय पहुंचे और एमडी से मिले। उन्होंने अधीक्षण यंत्री और कार्यपालन यंत्रियों को तलब किया। मंत्री ने सवाल किया कि प्रदेश में भरपूर बिजली होने के बावजूद कटौती क्यों हो रही है? लाइन खराब हो रही है तो समय पर क्यों नहीं सुधर रही? काम नहीं करने वाले हर अफसर, कर्मचारी को सख्ती से हिदायत दी जाए। कहीं भी ट्रांसफाॅर्मर जले तो एक घंटे में ठीक होना चाहिए। दूसरी खराबी आए तो टीम तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों को सख्त लहजे में निर्देश दिया कि बिजली कटौती की वजह से सरकार की बदनामी नहीं होनी चाहिए।