काले कानून ने डाल दिया देश का भविष्य खतरे में : कमलनाथ

भोपाल। इस देश की पहचान कभी इसके संविधान और संस्कृति से हुआ करती थी। लेकिन केन्द्र की भाजपा सरकार ने अपनी मनमानी और हठधर्मिता से इस देश के भविष्य पर प्रश्रचिन्ह लगा दिया है। यह संभवत: पहली बार है, जब इस देश को काले कानून से आजादी दिलाने के लिए दुनिया का हर मुल्क विरोध में खड़ा दिखाई दे रहा है। मप्र सहित देश के सभी कांग्रेस शासित प्रदेशों ने इस कानून को मानने से इंकार किया है और हर मंच पर इसका विरोध भी करेंगे।

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बुधवार को राजधानी के रौशनपुरा चौराहा पर केन्द्र की आर्थिक नीतियों और एनआरसी तथा सीएए के विरोध मेंं जमा हुए हजारों लोगों के मजमे को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि दुनियाभर में इस कानून की वजह से हिन्दुस्तान की बदनामी हो रही है। उन्होंने कहा कि पहली बार देश को ऐसे झूठे जिम्मेदार मिले हैं, जो कहते कुछ हैं और करते कुछ हैं। उन्होंने कहा कि सदन से कुछ कहा जाता है और मंच पर आकर दूसरी बात से लोगों को बहलाने की कोशिश की जाती है। कमलनाथ ने कहा देश का धर्म, सम्प्रदाय, जाति, वर्ग इस कानून की मुखालिफत कर रहा है, लेकिन प्रधानमंत्री और गृहमंत्री लोगों को झूठे बहलावे में रखकर अपनी बात को गोलमोल करने की कोशिश कर रहे हैं।

बढ़ता गया कारवां

सुबह 11 बजे रोशनपुरा से शुरू होने वाले पैदल मार्च मेंं शामिल होने के लिए लोगों के काफिले पहुंचने का सिलसिला सुबह से ही शुरू हो गया था। बढ़ती भीड़ को देखते हुए आयोजकों को रोशनपुरा की बजाए रंगमहल तक रैली में आए लोगों को फैलाना पड़ गया। धीमी शुरूआत के बाद यह मजमा इतना बढ़ा कि जब मुख्यमंत्री कमलनाथ ने दोपहर 12.15 बजे पैदल मार्च शुरू किया तो करीब 45 मिनट बाद भी लोगों के काफिलों का रैली के अंतिम छोर मिंटो हॉल तक पहुंचने का सिलसिला जारी था। 

तिलक-टोपी नजर आए साथ

रैली में शामिल होने के लिए सभी धर्मों के लोग मौजूद थे। रोशनपुरा पर लगाए गए मंच पर हिन्दू, मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी समेत सभी धर्मगुरू मौजूद थे। इसके अलावा रैली में बड़ी तादाद में लोग जहां गांधी टोपी के साथ मुस्लिम टोपी लगाए हुए थे, वहीं इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की भी थी, जिन्होंने माथे पर लंबे तिलक लगा रखे थे। रैली में शामिल होने के लिए जहां बुजुर्ग और युवा मौजूद थे, वहीं बड़ी तादाद में महिलाएं और बच्चे भी आए हुए थे।

सभी की कोशिश रही 

रैली को सफल बनाने के लिए राजधानी के कद्दावर मंत्री आरिफ अकील, पीसी शर्मा और दमदार विधायक आरिफ मसूद लगे हुए थे। वहीं मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, वरिष्ठ कांग्रेस नेता अजय सिंह राहुल के अलावा सुरेश पचौरी और अन्य नेताओं ने भी रैली कामयाब बनाने की मेहनत की। इधर मसाजिद कमेटी ने ईमाम-मोअज्जिन की शिरकत से मजमे को रौनक दी तो जमीयत उलेमा हिन्द की प्रदेश इकाई ने मदरसा और स्कूली बच्चों के अलावा बड़ी तादाद में शहर के लोगों को जोडऩे का काम किया। जमीयत के प्रदेश सचिव हाजी इमरान हारुन, मसाजिद कमेटी के एसएम सलमान और विभिन्न सामाजिक संगठनों के लोगों ने भी यहां अपनी महती भूमिका अदा की।

मंजर ने बांधा समां

अंतर्राष्ट्रीय शायर मंजर भोपाली भी अपनी नैतिक जिम्मेदारी निभाते हुए रैली में पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने मुल्क से मुहब्बत को लेकर लिखे गए कई अशआर सुनाए। उन्होंने कहा कि दुनिया के इतिहास में यह पहला मामला होगा, जब किसी देश के लिए बनाए गए कानून का विरोध के करने के लिए दुनियाभर के देश विरोध में खड़े दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन हालात से बचने का एकमात्र रास्ता यही है कि केन्द्र सरकार इस कानून को बदले और इसका ऐलान सदन से ही करे। 

झलकियां

-रोशनपुरा पहुंचने वाले हर मार्ग पर सुबह से छोटे-बड़े वाहनों और पैदल टुकडिय़ों की आवाजाही शुरू हो गई थी।

-रोशनपुरा की तरफ से जाने वाले रास्तों को सुबह से ही डायवर्ट कर दिया गया था।

-रैली के बाद मिंटो हॉल पहुंचे कार्यकर्ता अपने-अपने नेताओं के साथ फोटो खिंचवाते नजर आए।

-मंच से ऐलान किया जा रहा था कि कोई भी कार्यकर्ता व्यक्तिगत नारेबाजी नहीं करेगा, लेकिन रैली खत्म होने के बाद कार्यकर्ता अपने नेताओं की जिंदाबाद करने से नहीं चूके।

-मंच पर धर्मगुरूओं के अलावा नेताओं की तादाद इतनी हो गई कि मंच छोटा पड़ता नजर आया।

-भीड़ के हालात का फायदा उठाते हुए जेबकतरों ने अपनी कला का प्रदर्शन करने में कोताही नहीं की। इस बीच शायर मंजर भोपाली का मोबाइल भी कोई जेबकतरा ले उड़ा।