लोकसभा इलेक्शन: अब इन सीटों पर अपनों ने बढ़ाई टेंशन, रुठों को मनाने में जुटी कांग्रेस

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भोपाल। विधानसभा चुनाव में एतजुटता का संदेश देने वाली कांग्रेस के पत्ते एक बार फिर लोकसभा चुनाव में बिखरने लगे हैं। टिकट बंटवारे को लेकर कार्यकर्ताओं के बीच नाराजगी है। कई सीटों पर तो खुलकर विरोध सामने आ रहा है। जिन्हें पार्टी ने टिकट नहीं दिया उन्होंने अब घोषित प्रत्याशियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।  बैतूल, शहडोल और मंडला के बाद अब खंडवा और सतना में भी विरोध तेज हो गया है। खंडवा में अरुण यादव और सतना में राजाराम त्रिपाठी के खिलाफ कार्यकर्ता खुलकर विरोध में आ गए हैं। ऐसे में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के माथे पर चिंता की लकीरें बढ़ गई हैं।

दरअसल, बीजेपी की तरह कांग्रेस में भी बगावत के सुर तेजी से फूट रहे हैं। मंडला उम्मीदवार कमल मरावी के विरोध में महिला कांग्रेस की दो ब्लॉक अध्यक्षों सहित चार महिला सरपंचों ने पार्टी से इस्तीफ़ा देकर बीजेपी का दामन थाम लिया। वहीं, बैतूल, मंडला और शहडोल के बाद अब खंडवा से कांग्रेस प्रत्याशी और पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरुण यादव का विरोध देखने को मिल रहा है। यहां मंत्री पद ना मिलने से नाराज निर्दलीय विधायक सुरेंद्र सिंह ‘शेरा’ विरोध कर रहे हैं। शेरा ने निर्दलीय नामांकन का ऐलान किया है। उन्होंने पत्नी के लिए टिकट की मांग की थी, लेकिन पार्टी ने यादव पर भरोसा जताया। जिससे शेरा नाराज हो गए है, हालांकि पार्टी नेताओं द्वारा लगातार शेरा को मनाने की कवायद की जा रही है।  

विंध्य में भी भारी नाराजगी

सतना में राजाराम त्रिपाठी को टिकट देने से पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह नाराज हैं। चूंकि बीते दिनों पैनल से लेकर बैठक तक सतना से राजेन्द्र सिंह का ही नाम आगे चल रहा था, लेकिन ऐन मौके पर पार्टी ने त्रिपाठी के नाम का ऐलान कर दिया। शहडोल में भाजपा छोड़ आई प्रमिला को टिकट मिलने पर कार्यकर्ताओं में असंतोष है। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से कांग्रेस में आईं सुनीता परस्ते भी इसको लेकर अपनी नाराजगी नेताओं तक पहुंचा चुकी हैं। जिला पंचायत में चार से पांच बार जनप्रतिनिधि रहने वाली कांग्रेस की पुरानी नेता कृष्णा व सावित्री भी प्रमिला सिंह को प्रत्याशी बनाए जाने से असंतुष्ट हैं।

गौरतलब है कि नवंबर में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव के दौरान भी कांग्रेस में बिखराव देखने को मिला था। केंद्रीय नेतृत्व ने पार्टी को एक जुट करने के लिए पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह को जिम्मा सौंपा था। उन्होंने बूथ स्तर से लेकर पार्टी ने बड़े नेताओं को एकजुट कर चुनाव में एक साथ मैदान में उतारा था। जिसका नतीजा रहा कांग्रेस सरकार बनाने में कामयाब हुई। अब फिर वही हालात कांग्रेस में देखने को मिल रहे हैं। दिग्विजय सिंह खुद भोपाल से प्रत्याशी हैं। ऐसे में कोई बड़ा नेता कार्यकर्ताओंं को एकजुट करता नहीं दिख रहा। स्थानीय कार्यकर्ताओं में पैराशूट नेताओं को टिकट देने पर भी असंतोष है।

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