loksabha-election-every-one-eye-on-these-seats-in-madhya-pradesh

भोपाल| लोकसभा चुनाव 2019 के ऐलान के साथ ही सभी ���ार्टियां सत्ता के संघर्ष में कूद पड़ी हैं। मध्य प्रदेश में पिछले एक साल से ही चुनावी माहौल है| पहले विधानसभा चुनाव और अब लोकसभा चुनाव को लेकर नेताओं का काफिला अब गाँव गाँव में पहुंचेगा| पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा को पूर्ण बहुमत मिला था, जिसमे मध्य प्रदेश की सीटों का बड़ा योगदान था| प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों पर भाजपा ने 27 और कांग्रेस ने दो सीटों पर जीत दर्ज की थी। लेकिन इस बार हालात बदल गए हैं, हाल ही में कांग्रेस विधानसभा चुनाव में मिली जीत से उत्साहित है और ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतने की फ़िराक में है, वहीं भाजपा प्रदेश की नई सरकार के तीन माह के कार्यकाल और देश में सक्षम नेतृत्व को मुद्दा बनाकर ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतना चाहती है| ऐसे में इस बार माना जा रहा है कि इस बार भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकबला होगा। देश भर की नजर मध्य प्रदेश पर है, 29 सीटों में से 6 सीटें भी ऐसी हैं जिन पर सबकी नजर है|  

इन सीटों पर सबकी नजर 

इंदौर

इस कारण है प्रमुख सीट : लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन की परंपरागत सीट है।

2014 के परिणाम: सुमित्रा महाजन ने 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के सत्यनारायण पटेल को हराया था। सुमित्रा महाजन को 8,54,972 (64.93 फीसदी) वोट मिले थे जबकि सत्यनारायण को 3,88,071(29.47 फीसदी) वोट मिले थे। सुमित्रा महाजन ने इस चुनाव में 4,66,901 वोटों से जीत हासिल की थी। सुमित्रा महाजन 1989 से लगातार यहां से चुनाव जीत रही हैं।

2019 में क्यों खास: सुमित्रा महाजन एक बार फिर वे यहां से टिकट की दावेदार हैं वहीं, कांग्रेस की तरफ से किसी बड़े चेहरे को उतारने की तैयारी है।

इंदौर का जातिगत समीकरण: 2011 की जनगणना के मुताबिक इंदौर की जनसंख्या 34,76,667 है। यहां की ज्यादातर आबादी शहरी क्षेत्र में रहती ही। इंदौर की 82.21 फीसदी आबादी शहरी और 17.79 फीसदी आबादी ग्रामीण क्षेत्र में रहती है। 16.75 फीसदी जनसंख्या अनुसूचित जाति, 4.21 फीसदी जनसंख्या अनुसूचित जनजाति के लोगों की है।

गुना

इस कारण है प्रमुख सीट : सिंधिया परिवार की परंपरागत सीट।

2014 के परिणाम: 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बीजेपी के जयभान सिंह पवैया को हराया था। इस चुनाव में सिंधिया को 517036 (52.94 फीसदी) वोट मिले थे और पवैया को 396244 (40.57 फीसदी) वोट मिले थे। दोनों के बीच हार जीत का अंतर 120792 वोटों का था। 2004 से ज्योतिरादित्य सिंधिया यहां से लगातार कांग्रेस के टिकट पर सांसद हैं।

2019 में क्यों खास: इस सीट पर सिंधिया परिवार का ही कब्जा रहा है। जब भी सिंधिया परिवार का कोई सद्सय इस सीट से चुनाव लड़ता है जीत उसी की होती है। राजमाता विजयाराजे सिंधिया यहां से 6 बार, माधवराव सिंधिया 4 बार सांसद रहे। ज्योतिरादित्य सिंधिया के एक बार फिर यहां से लड़ने की बात चल रही है।

गुना का जातिगत समीकरण: यहां मुख्यतः हिन्दू, मुस्लिम तथा जैन समुदाय के लोग रहते हैं। 2011 की जनगणना के मुताबिक गुना की जनसंख्या 2493675 है। यहां की 76.66 फीसदी आबादी ग्रामीण क्षेत्र और 23.34 फीसदी आबादी शहरी क्षेत्र में रहती है। 18.11 फीसदी लोग अनुसूचित जाति और 13.94 फीसदी लोग अनुसूचित जनजाति के लोग हैं।

छिंदवाड़ा

इस कारण है प्रमुख सीट : मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ का गृह क्षेत्र।

2014 के परिणाम: 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्यप्रदेश के मौजूदा सीएम कमलनाथ ने जीत दर्ज की थी। उन्होंने बीजेपी के चौधरी चंद्रभान सिंह को हराया था। कमलनाथ को 5,59,755 (50.54 फीसदी) और चंद्रभान सिंह को 4,43,218 (40.02 फीसदी) वोट मिले थे। यानी दोनों के बीच जीत हार का अंतर 1,16,537 वोटों का था।

2019 में क्यों खास: कमलनाथ के मध्यप्रदेश के सीएम बनने के बाद से इस सीट पर अब उनके बेटे नकुलनाथ के चुनाव लड़ने की चर्चा है। कमलनाथ यहां से आम चुनावों में कभी नहीं हारे। सिर्फ 1997 में हुए उप-चुनाव में भाजपा के सुंदरलाल पटवा ने कमलनाथ को हराया था। कमलनाथ यहां से 10 बार सांसद चुने गए।

छिंदवाड़ा का जातिगत समीकरण: 2011 की जनगणना के मुताबिक छिंदवाड़ा की जनसंख्या 2090922 है। यहां की 75.84 फीसदी आबादी ग्रामीण क्षेत्र और 24.16 फीसदी शहरी क्षेत्र में रहती है। 11.11 फीसदी जनसंख्या अनुसूचित जाति और 36.82 फीसदी जनसंख्या अनुसूचित जनजाति की है।

ग्वालियर

इस कारण है प्रमुख सीट : सिंधिया परिवार का दबदबा रहा पर अब भाजपा का गढ़ बन चुकी है ये सीट।

2014 के परिणाम: 2014 के चुनाव में भाजपा के नरेंद्र सिंह तोमर ने कांग्रेस के अशोक सिंह को हराया था। इस चुनाव में तोमर को जहां 442796 (44.69 फीसदी) वोट मिले थे तो वहीं अशोक सिंह को 413097 (41.69 फीसदी) वोट मिले थे। दोनों के बीच हार जीत का अंतर 29699 वोटों का था।

2019 में क्यों खास: इस सीट से इस बार ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी पत्नी प्रियदर्शनी राजे में से किसी एक के चुनाव लड़ने की अटकलें हैं। नरेन्द्र सिंह तोमर केन्द्रीय मंत्री हैं।

ग्वालियर का जातिगत समीकरण: ग्वालियर की 2011 की जनगणना के मुताबिक ग्वालियर की जनसंख्या 2730472 है। 51.04 फीसदी आबादी ग्रामीण क्षेत्र और 48.96 फीसदी आबादी शहरी क्षेत्र में रहती है। ग्वालियर में 19.59 फीसदी लोग अनुसूचित जाती के हैं और 5.5 फीसदी लोग अनुसूचित जनजाति के हैं।

राजगढ़

इस कारण है प्रमुख सीट : राजगढ़ लोकसभा सीट राज्य की वीआईपी सीटों में से एक है। पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह का गढ़ है ये सीट। यहां से उनके भाई लक्ष्मण सिंह पांच बार लोकसभा सांसद रहे।

2014 के परिणाम: 2014 के चुनाव में बीजेपी के रोडमल नागर ने कांग्रेस अंलाबे नारायण सिंह को हराया था। इस चुनाव में नागर को 5,96,727(59.04 फीसदी) और अंलाबे नारायण को 3,67,990(36.41 फीसदी) वोट मिले थे। दोनों के बीच हार जीत का अंतर 2,28,737 वोटों का था।

2019 में क्यों खास: इस बार इस लोकसभा सीट से पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के चुनाव लड़ने की संभावना है।

राजगढ़ का जातिगत समीकरण: 2011 की जनगणना के मुताबिक राजगढ़ में 24,89,435 जनसंख्या है। यहां की 81.39 फीसदी जनसंख्या ग्रामीण इलाके और 18.61 फीसदी आबादी शहरी क्षेत्र में रहती है। इस क्षेत्र में गुर्जर, यादव और महाजन वोटर्स की संख्या अच्छी खासी है। 18.68 फीसदी अनुसूचित जाति और 5.84 अनुसूचित जनजाति के हैं।

भोपाल

इस कारण है प्रमुख सीट : भाजपा की पारंपारिक सीट। 1984 से लगातार भाजपा यहां से चुनाव जीत रही है।

2014 के परिणाम: 2014 के लोकसभा चुनाव में आलोक संजर ने कांग्रेस के प्रकाश मंगीलाल शर्मा (पीसी शर्मा) को पराजित किया था। आलोक संजर को इस सीट में 7,14,178 (63.19) फीसदी और प्रकाश मंगीलाल को 3,43,482 (30.39 फीसदी) वोट मिले थे। आलोक ने प्रकाश मंगीलाल को 3,70,696 वोटों से हराया था।

2019 में क्यों खास: इस बार यहां से केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर के चुनाव लड़ने की संभावना है।

भोपाल का का जातिगत समीकरण: 2011 की जनगणना के मुताबिक भोपाल की जनसंख्या 26,79,574 है। 23.71 फीसदी आबादी ग्रमीण क्षेत्र में रहती है जबकि 76.29 फीसदी शहरी इलाके में रहती है। 15.38 फीसदी जनसंख्या अनुसूचित जाति की है और 2.79 फीसदी अनुसूचित जनजाति की है।