अब पशु हांकना सीखेंगे मप्र के बेरोजगार, ट्रेनिंग देगी सरकार

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भोपाल।

देश में बेरोजगारी की दर साल 2016 के बाद से अब तक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। फरवरी, 2019 के दौरान देश में बेरोजगारी की दर 7.2 फीसदी तक पहुंच गई है। वही प्रदेश की कमलनाथ सरकार इसे मुद्दा बनाकर बेरोजगारों का मजाक बना रही है। सरकार ने फैसला किया है कि वह युवा स्वाभिमान योजना में युवाओं को मवेशियों को हांकने की भी ट्रेनिंग देगी। इसके लिए बकायदा सरकार ने आवेदन भी बुलाए है। 100  दिन की ट्रेनिंग के बाद इस पद के लिए सरकार 4000  हजार रुपए स्टायपेंड भी देगी। इस योजना का लाभ 21  से 30  साल तक के युवा ले सकते है। सरकार के इस फैसले का विपक्ष ने मजाक उड़ाया है। विपक्ष का कहना है कि ऐसे करके सरकार ना सिर्फ बेरोजगारी बल्कि युवाओं का भी देशभर में मजाक बना रही है।इधर, सरकार के इस फैसले की चर्चा सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक हो रही है। कुछ इसे सही तो कुछ इसे गलत बता रहे है।

राज्य सरकार ने ट्रेनिंग देने वाले विषयों में शहरी क्षेत्र में गायों को हांकने के ट्रेंड को भी शामिल किया है। हैरानी की बात तो ये है कि सरकार के मवेशियों को हांकने के ट्रेंड में युवा खासी दिलचस्पी भी दिखा रहे हैं। भोपाल और इंदौर में युवाओं ने मवेशी हांकने के ट्रेंड में ट्रेनिंग के लिए आवेदन भी कर रहे हैं। इसके लिए सरकार ने मध्यप्रदेश में अकेले भोपाल और इंदौर जैसे बड़े शहरों में 42 -42 वेकेंसी भी निकाल दी है।योजना में रोजगार ट्रेड में इलेक्ट्रिशियन, एकाउंट असिस्टेंट, मोबाइल रिपेयरिंग, ड्राइवर, फोटोग्राफर जैसे कार्यों के साथ ही पशु हांकने के काम को भी शामिल किया गया हैं। वैसे शहरी इलाकों के कांजी हाउस में गायों व अन्य मवेशियों को हांक कर लाने की व्यवस्था होती है और सरकार इस तरह के ट्रेंड में युवाओं को ट्रेनिंग देने का प्लान कर रही है। युवा स्वाभिमान योजना के पोर्टल पर इस ट्रेंड से जुड़ी जानकारी शामिल है। इस योजना के तहत राज्य सरकार युवाओं को सौ दिन की ट्रेनिंग के जरिए चार हजार रुपये मासिक स्टाइफंड देने की व्यवस्था कर रही है और अब तक ढाई लाख से ज्यादा युवाओं ने इस योजना में पंजीयन कराया है।सरकार के इस कदम का मजाक बन रहा है लेकिन अब इससे भी अजीबोगरीब हालात ये है कि पशुओं को हांकने के लिए अकेले भोपाल में 12 और इंदौर शहर में 3 पदों के लिए युवा स्वाभिमान योजना के पोर्टल पर आवेदन कर चुके हैं। इस बात का भी आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि बेरोजगारों की परिस्थितियां उन्हें क्या-क्या करने को मजबूर कर रही हैं और क्यों कर रहीं हैं।

इसके पीछे सरकार का मत है कि वह पूरी ताकत से गौशाला बनाने और गौरक्षा पर फोकस किए हुए हैं और गाय को हम लोग माता के रूप में मानते हैं। उसका सब तरह से संरक्षण होना चाहिए। हांकने का मतलब यह नहीं कि गाय को भगाना है। मतलब यह है कि उसे संरक्षित तरीके से गौशाला में ले जाना है और उस को संरक्षित रखने के लिए ट्रेनिंग दी जा रही है ताकि गाय को कोई परेशानी न हो। इसलिए इसकी ट्रेनिंग दी जा रही हैं। गाय को संभाल कर गौशाला तक पहुंचाना है, गाय को कैसे पालते हैं, ये आज के नौजवान इस चीज को नहीं मानते हैं।

किस ज़िले में कितने पद

जिले के हिसाब से पोस्ट को देखा जाए तो अकेले भोपाल जिले में इसके लिए 50 पोस्ट है। इनमें से भोपाल शहर में 42 तो वहीं बैरसिया में 8 पोस्ट निकाली गई हैं. इसके बाद इंदौर ज़िले में 106 पोस्ट, आगर जिले में 52 पोस्ट, अलीराजपुर में 25 पोस्ट, अशोकनगर में 45 पोस्ट, बालाघाट में 68 पोस्ट, बड़वानी में 64 पोस्ट, बैतूल में 83 पोस्ट, भिंड में 101 पोस्ट, बुराहनपुर में 36 पोस्ट, छतरपुर में 134 पोस्ट और छिंदवाड़ा में 163 पोस्ट रखी गई हैं।

गौरतलब है कि देश में बेरोजगारी की दर साल 2016 के बाद से अब तक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) द्वारा ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि फरवरी, 2019 के दौरान देश में बेरोजगारी की दर 7.2 फीसदी तक पहुंच गई है। यह सितंबर, 2016 के बाद का अब तक का रिकॉर्ड स्तर है। फरवरी, 2018 में बेरोजगारी दर 5.9 फीसदी थी। फरवरी में करीब 40 करोड़ लोगों के नौकरी में रहने का अनुमान है, जबकि पिछले साल फरवरी में यह संख्या 40.6 करोड़ के आसपास थी। CMIE के अनुमान के अनुसार, भारत में वर्किंग एज वाली जनसंख्या हर साल करीब 2.3 करोड़ बढ़ जाती है। यदि इसके 42 से 43 फीसदी हिस्से को लेबर फोर्स में शामिल होने का अंदाजा लगाया जाए तो हर साल 96 लाख से 99 लाख नए लोग लेबर फोर्स में जुड़ जाते हैं।वही गत दिसंबर माह में एक अखबार की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि साल 2017-18 में बेरोजगारी का स्तर 45 साल के रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गया है। अखबार में दावा किया गया था कि यह एनएसएसओ की लीक रिपोर्ट है।

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