Malini-Goud-accused-of-neglecting-Jayawardhana-in-indore

भोपाल/इंदौर।

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के बेटे और कमलनाथ सरकार में नगरीय प्रशासन मंत्री जयवर्धन सिंह पर इंदौर महापौर मालिनी गौड़ ने उपेक्षा का आरोप लगाया है। महापौर का कहना है कि मंत्री न तो उनका फोन उठाते हैं, न मैसेज का जवाब देते हैं। इसी उपेक्षा के चलते रविवार को उन्होंने आजाद नगर में हुए सिटी बसों, इलेक्ट्रिक बस और कार समेत अन्य कार्यों के लोकार्पण समारोह का भी बहिष्कार कर दिया। विवाद बढ़ता देख देर शाम दिग्विजय गौड़ से मिलने पहुंचे और दोनों के बीच करीब 20  मिनट तक चर्चा हुई। इस दौरान उन्होंने गौड़ की स्वच्छता को लेकर जमकर तारीफ की और शुभकामनाएं दी।

दरअसल, रविवार को इंदौर के आजद नगर में हुए सिटी बसों, इलेक्ट्रिक बस और कार समेत अन्य कार्यों के लोकार्पण समारोह का होना था, जिसमें नगरीय विकास मंत्री जयवर्धन सिंह और महापौर मालिनी गौड़ को पहुंचना था, लेकिन गौड़ ने जयवर्धन पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया। गौड़ ने कहा कि प्रदेश में जब से कांग्रेस की सरकार बनी है, तब से उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है। उनकी उपेक्षा और भेदभाव किया जा रहा है। नगरीय प्रशासन मंत्री न उनका फोन उठाते हैं न मैसेज का जवाब देते हैं।इसके अलावा महापौर इस बात से भी नाराज थी कि इस बार स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 के दिल्ली में होने वाले पुरस्कार वितरण समारोह में कलेक्टर के स्थान पर नेता प्रतिपक्ष को आमंत्रित किया गया है। महापौर ने कहा कि लगातार उपेक्षा के चलते वह बड़ा कदम उठाएगी। 

महापौर के कार्यक्रम पर ना पहुंचने पर उठे सवाल

गौड के कार्यक्रम में ना पहुंचने पर चर्चाओं का बाजार गर्म रहा ।कार्यक्रम के बहिष्कार करने पर सवाल उठने लगे। जब इस बारे में जयवर्धन से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि  गौड़ शहर की प्रथम नागरिक हैं। मैं उनका सम्मान करता हूं। उन्हें ससम्मान आमंत्रण दिया गया था। फोन करके पूछूंगा कि वे क्यों नहीं आईं? 

देर शाम गौड़ से मिलने पहुंचे दिग्विजय

वही विवाद बढ़ता देख देर शाम जयवर्धन के पिता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह महापौर के घर पहुंच गए और दोनों के बीच लगभग 20 मिनट चर्चा हुई।इस दौरान दिग्विजय सिंह ने ट्रेंचिंग ग्राउंड को कचरा मुक्त करने पर उनकी प्रशंसा की तो इंदौर को सफाई में लगातार तीसरी बार संभावित तौर पर नंबर वन आने की शुभकामना दी। सूत्रों के मुताबिक लोकसभा चुनाव से पहले दिग्विजय नहीं चाहते कि उनके पुत्र मंत्री इस तरह के राजनीतिक विवाद में पड़ें। यही वजह है कि वे पहली बार महापौर निवास पहुंच गए।