राजनीति का भेदभाव और पिसते किसान..

भोपाल।

इस साल प्रदेश में हुई भारी बारिश ने किसानों की कमर तोड़ के रख दी है। फसलों पूरी तरह से चौपट हो गई, अबतक किसानों मुआवजा नही मिला।ऐसे में पहले से ही कर्ज में डूबे किसान आत्महत्या को मजबूर हो रहे है।  प्रदेश के किसानों की बदहाली पर एक जागरुक नागरिक होने के नाते भोपाल की ममता तिवारी ने नाराजगी जताई है। उन्होंने केन्द्र द्वारा प्रदेश सरकार को फंड न देने पर कमलनाथ कैबिनेट के मोदी सरकार के खिलाफ दिल्ली में जाकर धरने देने का समर्थन किया है और वहां जाकर सामूहिक रुप से उपवास कर धरना देने की बात कही है। उन्होंने केन्द्र द्वारा प्रदेश सरकार को किसानों के लिए राहत राशि ना देने पर नाराजगी जताई है।उन्होने पीएम मोदी पर भेदभाव का आरोप लगाया है। बता दे कि अन्य राज्योंं में केन्द्र सरकार द्वारा किसानों के लिए राहत राशि जारी कर दी है, लेकिन मध्यप्रदेश में मदद के लिए अभी तक एक रुपया नही पहुंचा है।जिसके चलते मंत्रियों ने सरकार को दिल्ली में जाकर धरना देने की मांग उठाई है। जिस पर सीएम कमलनाथ ने विचार करने को कहा है।

 ममता का कहना है कि जिस देश को कृषि प्रधान देश कहा जाता है उसी देश के एक प्रदेश का किसान अतिवृष्टि से चौपट फसलों को देख कर आत्महत्या कर रहा है। शायद देश के मालिक को ये सारा तमाशा करने और देखने में मजा आता है, इसलिए वो प्रदेश के प्रतिनिधि का उपवास द्वारा विरोध करने का इंतजार कर रहे है। लेकिन वो अकेले क्यो ये हमारी लिए भी बडी समस्या है।हमें भी प्रतिनिधियों के साथ मिलकर दिल्ली जाकर मालिक के सामने तमाशा करना चाहिए, फिर देखते है मालिक का दिल पसीजता है या नही या फिर वे हवा में हाथ हिलाते हुए विदेश निकल जाते है अपनी भूख से बिलखती सौतेली संतानों को छोड़कर।

ममता ने आगे कहा कि आज एक समाचार पत्र में पढ़ा एक गरीब किसान ने भारी बारिश से खराब करीब तीस क्लिवंटन खराब मक्का पशुओं के लिए दान कर दिया। मुझे तो वो बड़े दिल वाला लगा जो अपना पेट नही भर पाया तो कम से कम पशुओ का तो भर दिया।ये होता है असली पिता और पालनहार का दिल।

         

पीड़ितों के सब्र का बांध टूट गया

                  आखिर बाढ़ की राहत सामग्री कौन निगल गया…???

                          या उन्हें संसद के गलियारों मत दिखाओ

                                       कही लहू ना बिखर जाये तुम्हारी फायलों में

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