शिवराज सिंह चौहान का ऐलान- बंद नही होगी मंडियां, प्‍याज के भावांतर की राशि भी देंगे

मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि कृषि उपज मंडियां बंद नहीं होगी और प्‍याज के भावांतर की राशि भी किसानों को दी जायेगी।

shivraj singh chauhan

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मंडी कर्मचारी-अधिकारियों की हड़ताल के बीच मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhaan) का बड़ा बयान सामने आया है। मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि कृषि उपज मंडियां बंद नहीं होगी और प्‍याज के भावांतर की राशि भी किसानों को दी जायेगी।

शिवराज ने कहा है कि प्रदेश की कोई भी कृषि उपज मण्‍डी बंद नहीं होगी। किसान चाहें तो अपनी उपज घर बैठे या मण्‍डी के बाहर बेच सकेंगे। किसानों (Farmers) को यह स्‍वतंत्रता दी गई है। किसान बिल के तहत अगर किसान को फसल मंडी में बेचना है तो मंडी में बेचे, मंडी बंद नहीं होंगी और मंडियां बनाएंगे। लेकिन अगर कोई मेरी फसल खेत से ही खरीद ले जाए, अच्छे दाम भी दे तो बुराई क्या है। सिर्फ विरोध की राजनीति नहीं होना चाहिए। प्रधानमंत्री और मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री कह रहा है। कोई चिंता की बात नहीं है।वही उन्‍होंने कहा कि किसानों को प्‍याज के भावांतर की राशि भी दी जायेगी। कोरोना के चलते प्रदेश के उद्योग धन्‍धे ठप्‍प हैं लेकिन इसके बावजूद सरकार कर्ज लेकर किसानों की सहायता करेगी। ढाई एकड़ भूमि वाले किसानों के बच्‍चे यदि मेडिकल या इन्‍जीनियरिंग कॉलेज में पढाई करते है तो उनकी फीस शासन देगी।

वही सब्सिडी को लेकर कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा किसान फसल बीमा से लेकर खाद, नलकूप, पॉली हाउस, वेयर हाउस और पशु समेत किसानों के लिए अन्य तरह की योजनाएं चलाई जा रही हैं। यह कंपनी के माध्यम से किसानों तक पहुंचाई जाती हैं। इन सबकी सब्सिडी तय कर लेते हैं और उसे बांटकर किसानों के खातों में सीधे डाल देते हैं। अब किसान खुद ही तय कर ले, उसे क्या करना है। ऐसे में कोई खेल नहीं हो पाएगा। खाद में भी खेल होता है। कंपनी छोड़ो और किसान के खाते में अब पैसा डाल दो। किसान खुद बाजार में जाकर खरीदकर लें। सब मिलकर तय करेंगे। सीएम ने कहा कि इस संबंध में प्रधानमंत्री से बात करूंगा। अगर तय हो गया तो कहीं कोई आवेदन करने की जरूरत नहीं है। कंपनी का खेल खत्म हो जाएगा। किसान और सरकार सीधे जुड़ जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रदेश के जिलों में हो रही फल और सब्जी की पहचान स्थापित करने के लिए 7 हजार 500 करोड़ रुपये उपलब्ध करायें हैं। ‘एक जिला-एक उत्पाद योजना’ के तहत जिलों के मुख्य कृषि उत्पाद को बेहतर बनाने के लिए कदम उठाए जाएंगे। मध्यप्रदेश आत्मनिर्भर कृषि मिशन के अंतर्गत इन फसलों की गुणवत्ता सुधार, सोर्टिंग, ग्रेडिंग, पैकिंग आदि कर इस प्रकार वैल्यू एडिशन किया जाएगा, जिससे विदेशों में भी प्रदेश के कृषि उत्पादों की मांग बढ़े। जिलों में एक्सपोर्ट कलस्टर भी स्थापित किए जाएंगे। इस मिशन के अंतर्गत कृषि अधोसंरचना के लिए कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध होगा। यह ऋण किसानों, कृषकों के उत्पादक संघों और कृषक सहकारी संघों को ही प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराया जाएगा।