माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली मध्य प्रदेश (MP) की पहली बेटी – मेघा परमार

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सीहोर/अनुराग शर्मा. मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से कुछ ही दूर बसे सीहोर जिले की बेटी ने एक ऐसा काम कर दिखाया है, जो इससे पहले आज तक मध्यप्रदेश की किसी बेटी ने नहीं किया था। जी हां एक छोटे से गांव से निकलकर इस बेटी ने अपने सपनों को पंख लगाकर दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर तिरंगा लहराया है। यहां हम बात कर रहे हैं मेघा परमार की, जो सीहोर जिले के गांव भोजनगर की रहने वाली हैं। मेघा परमार ने बुधवार को 29029 फीट की ऊंचाई को फतह कर न केवल तिरंगा फहराया बल्कि सीहोर की मिट्टी और पत्थर भी माउंट एवरेस्ट की चोटी पर रख दिए। मध्य प्रदेश की ओर से ये यह कारनामा करने वाली वह पहली महिला बन गई है, इस कार्य के लिए मेघा 22 मार्च को सीहोर से रवाना हुई और 29 हजार 29 फीट चोटी पर चढ़ाई की. 24 साल की मेघा परमार ने बुधवार की सुबह 10 बजकर 45 मिनिट पर पूर्ण की। मेघा ने देश का तिरंगा ध्वज तो फहराया ही लेकिन उस चोटी पर सीहोर की मिटटी और पत्थर भी रख दिए।

मेघा ने दिया आईएएस मोहंती को धन्यवाद

मध्य प्रदेश में सीहोर के छोटे से गांव भोजनगर की रहने वाली किसान की इकलौती बेटी मेघा परमार ने अपनी जिद और जुनून के दम पर विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउन्ट एवरेस्ट को फतह कर सीहोर और मध्य प्रदेश का नाम देश और विश्व में रोशन कर दिया है। मेघा ने इस दौरान सबसे पहले उस शख्स को याद किया जिनकी मदद से ही मेघा आज इस मुकाम पर पहुंची हैं। ये शख्स हैं माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष आईएएस एसआर मोहंती। जिन्होंने मेघा की जिद और सपने को पहचाना और उसे इस मुकाम तक पहुंचने में मदद की। यही वजह थी कि मेघा ने एवेरेस्ट फतह करने के बाद सबसे ज्यादा आईएएस मोहंती को याद किया। इस सफलता को शेयर करने के लिए मेघा अपने साथ आईएएस की फोटो भी ले गई थी।

ऐसी है मेघा की जिंदगी की पूरी कहानी

दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर तिरंगा फहराकर इतिहास रचने वाली मेघा के सामने कई चुनौतियां थी| 24 साल की मेघा सीहोर जिले के एक ऐसे गांव से आती है, जिसकी आबादी ही महज 100 घरों में 1500 लोगों के बीच है। साधारण परिवार में जन्मी मेघा के सपने साधारण नहीं थे, उसकी सोच और लक्ष्य अगर एवेरेस्ट को छूना था और उसके इरादे भी एवेरेस्ट की तरह मजबूत था| लेकिन यह सब इतना आसान नहीं था|

ऐसे मिली उन्हे मदद

मेघा परमार माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष एसआर मोहंती के पास भी पहुंची| मेघा के जज्बे को देखकर वो भी चौक गए, उन्हें भी हैरानी हुई कि मध्य प्रदेश की लड़की इस बारे में सोच सकती है| लेकिन उन्होंने मेघा की जिद और उसके अंदर इस लक्ष्य को पाने की ललक देखकर उन्हें भी मेघा की सफलता पर भरोसा हो गया| इस बाद उन्होंने मेघा को भोपाल में एनसीसी के अधिकारियों के पास भेजा। उसके बाद मेघा ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। माउंट एवरेस्ट पर जाने के लिए 23 लाख रुपए जुटाने के लिए एक फंड बनाने का आइडिया उन्हीं का था। अनुमति दिलाने से लेकर पैसा जुटाने में मोहंती ने मेघा की बड़ी मदद की इसलिए मेघा की इस सफलता में आईएएस मोहंती की भी बड़ी भागीदारी रही है। मेघा अपने साथ एवेरेस्ट पर आईएएस मोहंती और उनकी पत्नी की तस्वीर साथ ले गई थी और एवेरेस्ट को छूने के बाद मेघा उनकी तस्वीर के साथ फोटो क्लिक कर शेयर की है।

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