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भोपाल। मध्य प्रदेश के पिछोर विधानसभा से कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक केपी सिंह पहली बार लोगों से सामने आए और मंत्री नहीं बनाए जाने को लेकर उनका दर्द एक बिर फिर छलका। उन्होंने कहा कि मंत्री मंडल में उन्हें शामिल नहीं किए जाने की सूचना 24 दिसंबर को ही मिल गई थी। जानकारी मिलने के बाद वह अपने गांव लौट आए थे। लेकिन कार्यकर्ताओं और समर्थकों के सवालों से बचने के लिए वह अगले दिन ग्वालियर और वहां से दिल्ली चले गए थे। स्थानीय लोगों को संबोधित करते हुए उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। 

इस वीडियो में वह अपने विधायक नहीं बनाए जाने की पूरी कहानी बताते सुनाई दे रहे हैं। स्थानीय लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि, ’25 दिसंबर को मैं सोच के तो ये आया था कि अब यहां रहेंगे। लेकिन जब मैं घर से निकला तो मुझे लगा भी और लोगों की नजरों से लगा कि अब सब पूछेंंगे कि मुझे मंत्री क्यों नहीं बनाया गया। ऐसी हालात में क्या जवाब देता। मन में आया कि अभी चले जाना बेहतर है। किस किस को जवाब देंगे। मेरी हालत ऐसी होने वाली थी कि जब किसी के घर में कोई गुजर जाता है। फिर लोग सवाल करते हैं कैसे हो गया क्यों हो गया, और हम नहीं चाहते बताना लेकिन फिर भी बताना पड़ता है। उस परेशानी से बचने के लिए मैं चुपचाप ग्लावियर चला गया, वहां एक रात रुका। वहां भी लोगों को पता चला तो लोगों का आना जाना। लेकिन कब तक छुपोगे। जीवन तो खत्म नहीं हुआ। ग्वालियर से चार बजे एक ट्रेन चलती है मैं उससे दिल्ली चला गया।’ 

वहां, कई और भी नाराज विधायक आ गए। किसी ने कहा कि इस्तीफा देदें, किसी ने कहा कि सरकार गिरा दो। गुस्से में जिसका जैसा मन होता है वैसा बोलता है। लेकिन मैंने जो हो सकता था वह किया। सबको राहुल जी से मिलवाया। इस तरह कुछ दिन कट गए। उन्होंने कहा कि भाजपा के लोग भी मिले, वह चाहते थे कि कांग्रेस की सरकार गिर जाए। उन्हें सात विधायकों की जरूरत थी। अगर सात विधायक कांग्रेस के या फिर निर्दलीय मिलकर उनके साथ चले जाते तो सरकार गिर जाती। मैं उनकाे रवाना करके चला गया द्वारकाधीश। वहां अपने मन को समझाया। रोने वाले के साथ कोई रोता नहीं लेकिन हंसने वाले के साथ सब हंसते हैं। उन्होंने कहा कि 15  साल बाद सरकार बनी है।  मंत्री बनना इतना जरूरी नहीं है जनता की सेवा करना जरूरी है। 

गौरतलब है कि केपी सिंह कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक हैं। वह लगातार कांग्रेस को जीत दिला रहे हैं। अब कांग्रेस की सरकार बनी तो उनके मंत्री बनाए जाने में नाम सबसे आगे था। लेकिन अंतिम समय पर उनका नाम मंत्री मंडल से हटा लिया गया। जिसके बाद से वह सभी से दूरी बना रखी थी। अब उन्होंने सबके सामने आ कर अपनी बात रखी है। और मंत्री मंडल में शामिल नहीं होने के बाद की पूरी कथा सबको सुनाई। उन्होंने वहां मौजूद लोगों को जीत दिलाने के लिए धन्यवाद दिया।