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भोपाल। पुलिस मुख्यालय ने सड़क हादसों में कमी लाने के लिए वाहनों की चेंकिग में सख्ती बरतने का परमान जारी किया है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में वाहनों की जांच की जाए। इसके पीछे पीएचक्यू ने तर्क दिया है कि ग्रामीण मार्गों पर होने वाले हादसों में सबसे ज्यादा मौतें होती हैं। जिसकी वजह अप्रशिक्षित चालकों द्वारा वाहन चलाना है। अब ऐसे वाहन चालकों के खिलाफ कड़ी कारवाई की जाएगी। 

पीएचक्यू के अनुसार वर्ष 2018 में 19 फीसदी सड़क हादसे राष्ट्रीय राजमार्ग,  27  प्रतिशत हादसे राजमार्ग पर एवं 54 प्रतिशत हादसे ग्रामीण एवं अन्य सड़क मार्गो पर हुई । इस प्रकार इन दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु की संख्या में 24 प्रतिशत एनएच पर 30 प्रतिशत एसएच पर तथा 46 प्रतिशत अन्य (ग्रामीण)मार्गों पर घटित हुई है । आकड़ों के हिसाब से ग्रामीण क्ष़ेत्रों में मौतों की संख्या ज्यादा होने के कारण इसमें सुधार की आवश्यकता प्रतीत होती है। 

ग्रामीणों को सिखाए जाएंगे यातायात के नियम 

सड़क हादसों में हो रही बढ़ोत्तरी को देखते हुए  पीटीआरआई के विशेष पुलिस महानिदेशक पुरुषोत्तम शर्मा निर्देश दिए हैं कि ग्रामीण क्षेत्र के थाने चेकिंग में तेजी लाएं। ग्रामीणों को यातायात नियम बताएं। ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतर आम लोगों में यातायात नियमों जानकारी नहीं होना, लायसेंस न बनाया जाना एवं ग्रामीण क्षेत्रों मे जो वाहन चलते है उनमें  वाहन मालिक, ड्रायवर, परिचालक,  ओवर लोडिंग, कुछ हद तक  परिवहन विभाग तथा पुलिस विभाग द्वारा इन इलाको में कम सख्ती के कारण सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं। 

 

एक साल में हादसों में 50 फीसदी की कमी का लक्ष्य

सड़क हादसों में मरने वालों में 17 से 40 वर्ष की उम्र के लोग होते हैं। सुप्रीम कोर्ट कमेटी द्वारा जारी निर्देश के अनुसार 2020 तक सड़क दुर्घटनाओं में 50 प्रतिशत कमी लाना है। इसके लिए यातायात से जुड़ी पुलिस इकाइयों को निर्देश जारी किए गए हैं कि  शराब पीकर या नशे की हालत में वाहन चलाना,  तेज गति से वाहन चलाना, बिना हेलमेट पहने दुपहिया वाहन चलाना,  तीन सवारी के साथ दुपहिया वाहन चलाना,  बिना सीट बेल्ट के चार पहिया वाहन चलाना,  वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग करना, लाल बत्ती का उल्लघंन करना, ओवर लोडिंग की हालत में सवारी यान/मालवाहक यान चलाना, विपरीत मार्ग में वाहन चलाना और   मालवाहक में सवारी को ��े जाने वालों पर कार्रवाई करें।