एमपी का महासंग्राम: ये 80 सीटें तय करेंगी किसकी बनेगी प्रदेश में अगली सरकार

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भोपाल। विधानसभा चुनाव की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है. विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने के लिए बीजेपी और कांग्रेस एड़ी चोटी का जोर लगा रही है और एक-दूसरे पर हमला बोलने का कोई मौका छोड़ रहे हैं। इस बार के विधानसभा चुनाव में दिग्गज राजनीतिक जानकारों की राय भी किसी एक दल के लिए बनती नहीं दिख रही है। सभी हार जीत के गणित में उलझ गए हैं। लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि राज्य की 80 ऐसी सीटें हैं जहां कांग्रेस और भाजपा में कांटे का मुकाबला है। हार-जीत का फैसला भी इन सीटों के नतीजे पर निर्भर है। कुल 230 विधानसभा सीटों में से भाजपा कई पर कांग्रेस से आगे है लेकिन कांग्रेस भी भाजपा की कई सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। इन सीटों के अलावा कुछ विधानसभा क्षेत्र ऐसे है जहां दोनों दलों के बीच बेहद नजदीकी मामला है। 

ऐसी 80 विधानसभी सीटें हैं जिनपर काफी करीबी मुकाबला है। जो दल इन सीटों पर जनता के बीच अपनी जगह बनाने में कामयाब होगा वही 15 वीं विधानसभा में सराकर बनाएगा। इनमें मालवा-निमाड़ की 15 सीट, मध्य भारत की 16 सीट, ग्वालियर-चंबल की 13 सीट, विंध्य क्षेत्र की 12 सीट, और नौ सीटें बुंदेलखंड की शामिल हैं। इनमें से कई सीटों पर तीसरे दल भी दस्तक दे रहे हैं। वहीं, मालवा समेत हाटपिपलिया, राऊ, खातेगांव, इंदौर-५, महिदपुर, सुवासरा, गरोठ, नीमच, मनावर और धर्मपुरी की सीटों पर टक्कर का मुकाबला है। 

निमाड़ में खरगोन, कसरावद, राजपुर और बड़वानी सीट पर कांटे का मुकाबला है। बात महाकौल की जाए तो यहां से जबलपुर पूर्व, उत्तर और पश्चिम, मुडवारा, बिछिया, बैहर, हरदा, होशंगाबाद, सिलवानी, भेंसदेही, गंज बासौदा, शमशाबाद, भोपाल मध्य, भोपाल दक्षिण-पष्चिम, सीहोर, इछावर, ब्यावरा और सारंगपुर में कांग्रेस और भाजपा आमने सामने है। वहीं, ग्वालियर-चंबल संभाग में ग्वालियर पूर्व, भिंड, गोहद, मेहगांव, अटेर, भांडेर, करैरा, पोहरी, मुंगवाली, मुरैना और अंबाह में भी चुनावी टक्कर देखने को मिल रही है। 

बुंदेलखंड की सागर, खुरई, टीकमगढ़, खरगपुर, छतरपुर,बिजावर, मल्हाढ़ा, जबेरा और पन्ना में भी इस बार कांग्रेस और भाजपा समेत बीएसपी में त्रिकोणिय मुकाबला है। विंध्य क्षेत्र में रीवा, देवतालाब, गुढ़, सतना, रेगांव, रामपुर बाघेलन, मैहर, चितरंगी, ब्यौहारी, पुष्पराजगढ़ और जैतपुर में भी मुकाबला रौचक है। 

भाजपा और कांग्रेस को करीब दस सीटों पर तीसरी शक्ति सीधेतौर पर चुनौती दे रही है। राजनीतिक विश्लेषक गिरजाशंकर के अनुसार इन दोनों पार्टियों के बीच कांटे का मुकाबला है। इस बार इस तथ्य से लिया जा सकता है कि करीबी टक्कर वाली सीटों की संख्या उन सीटों से अधिक है जहां पार्टी आसानी से जीत सकती है। कई बार ऐसा भी देखा गया है जो सीट चुनाव के समय कठिन दिखाई दे रही हो वहां के नतीजे अक्सर हैरान करने वाले भी होते हैं।