कैलाश का वार, ‘पांच दिन की सरकार में ही कमलनाथ में आया अहंकार’

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भोपाल| मध्यप्रदेश विधानसभा के दूसरे दिन स्पीकर पद के चयन को लेकर सदन में पक्ष विपक्ष में जमकर तीखी नोंकझोंक हुई | वहीं सदन के बाहर भी भाजपा और कांग्रेस नेता एक दुसरे के खिलाफ आरोप लगा रहे है| विपक्ष ने विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव का बहिष्कार कर दिया और सभी विपक्षी विधायक राजभवन से शिकायत करने पहुंच गए। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री कमलनाथ से इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने इसे लोकतंत्र का कला दिन बताया| अब बीजेपी के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कांग्रेस समेत मुख्यमंत्री कमलनाथ पर आरोप लगाए हैं| 

विजयवर्गीय ने विधानसभा अध्यक्ष चुनाव को लेकर मुख्यमंत्री कमलनाथ पर निशाना साधते हुए कहा 5 दिन की सरकार में ही कमलनाथ में अहंकार आ गया है| कमलनाथ सरकार ने विधानसभा की सारी परंपराएं तोड़ी हैं| उन्होंने कहा अहंकार तो रावण का नही रहा तो इनका क्या रहेगा|  

दरअसल, विधानसभा में अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर जमकर हंगामा हुआ| भाजपा ने जहां परम्परा तोड़ने का आरोप लगाया वहीं| 120 मतों के साथ एनपी प्रजापति विधानसभा के अध्यक्ष बने| वहीं विपक्ष के वॉकआउट के कारण विपक्ष में कोई वोट नहीं पड़ा। इससे पहले चुनाव की प्रक्रिया के दौरान जमकर हंगामा हुआ।  इससे पहले सदन में कांग्रेस विधायक नर्मदा प्रसाद प्रजापति को कांग्रेस ने विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए अपना उम्मीदवार बनाया है। दूसरी ओर विपक्ष ने भी विधायक विजय शाह को अपना प्रत्याशी बनाकर उतार दिया। इसके बाद विपक्षी दल वोटिंग की मांग कर रहे थे, लेकिन प्रोटेम स्पीकर दीपक सक्सेना ने सभी मांग खारिज करते हुए कांग्रेस नेता एनपी प्रजापति को स्पीकर घोषित कर दिया। हंगामा के बीच विधानसभा की कार्रवाई दो बार स्थिगित करना पड़ी। इसके बाद  प्रोटेम स्पीकर ने वोटिंग की मांग उठने के बाद मत विभाजन का ऐलान किया। इससे पहले भाजपा विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। भाजपा प्रोटेम स्पीकर द्वारा कांग्रेस के एनपी प्रजापति को बिना वोटिंग के विधानसभा अध्यक्ष घोषित करने का विरोध कर रही थी।  भाजपा वोटिंग के दौरान अनुपस्थित रही| | एनपी प्रजापति को 120 मत मिले| दीपक सक्सेना ने प्रोटेम स्पीकर होने के कारण वोट नही डाला | वहीं भाजपा ने विरोध करते हुए सदन के बाहर नारेबाजी की| वहीं एनपी प्रजापति ने पद ग्रहण कर लिया है| शिवराज सिंह चौहान ने इसे इतिहास का काला दिन बताया और बीजेपी विधायकों के साथ राजभवन तक पैदल मार्च कर विरोध जताया और राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा|