वित्त मंत्री ने कमाई वाले विभागों से पूछा- ‘कैसे भरे खाली खजाना’

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भोपाल। राज्य सरकार ने लोकसभा चुनाव के बीच आगामी बजट की तैयारी शुरू कर दी है।  सरकार खाली खजाने को भरने को लेकर भी चिंतित है। इसके लिए राजस्व जुटाने वाले विभागों से पूछा है कि खजाना भरने के लिए क्या किया जाए। 

लोकसभा चुनाव की तैयारियों के बीच सरकार ने 2019-20 के बजट की तैयारियां शुरू कर दी हैं। विभागों के बजट पर कैंची चलना तय है। इसके लिए विभागीय मंत्रियों से प्राथमिकताएं पूछी जा रही हैं। वित्तमंत्री तरुण भनोत ने सभी मंत्रियों को पत्र लिखकर योजनाओं की समीक्षा करने के साथ प्राथमिकता तय कर सिफारिश देने के लिए कहा है। वहीं सरकार का खजाना भरने वाले विभागों से कहा है कि वे इस बात पर गौर करके उपाय सुझाएं कि इसे कैसे भरा जा सकता है।

राज्य के खजाने की स्थिति इन दिनों ठीक नहीं है। हालात यह हैं कि नगरीय निकायों को चुंगी कर से मिलने वाली करोड़ों रुपए की राशि रोक ली गई है। इसकी वजह से निकायों में वेतन बांटने के लाले पड़ गए हैं। लोक निर्माण विभाग में दो माह बाद वेतन का भुगतान हुआ। वहीं, बड़े बिलों के भुगतान भी रुक गए हैं। राज्य के ऊपर कर्ज का बोझ भी लगभग पौने दो लाख करोड़ रुपए के ऊपर पहुंच गया है। इस स्थिति से उबरने और विभागीय योजनाओं को सुचारू रूप से जारी रखने के लिए वित्त विभाग ने हाथ खींचकर चलने की रणनीति बनाई है। सूत्रों के मुताबिक इसके मद्देनजर वित्त मंत्री तरुण भनोत ने सभी मंत्रियों को पत्र लिखकर कहा है कि विभागीय समीक्षा कर प्राथमिकता के आधार पर सिफारिश करें, ताकि बजट उसी हिसाब से आवंटित किया जा सके। राजस्व जुटाने वाले विभागों के मंत्रियों से आग्रह किया गया है कि वे सरकारी खजाने को भरने के उपाय सुझाएं। ताकि वचन पत्र में जो वादे किए हैं, उन्हें प्राथमिकता में पूरा किया जा सके। संभावना जताई जा रही है कि वित्त विभाग जून में प्रस्तावित विधानसभा के सत्र में बजट प्रस्तुत करेगा।


बजट प्रबंधन पर रहेगा पूरा जोर

सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस सरकार का पहले बजट में पूरा जोर वित्तीय प्रबंधन पर रहेगा। जनता से जुड़े कामों के लिए विभागों को राशि तो दी जाएगी पर गैरजरूरी खर्च पर रोक भी लगाई जाएगी। इसके लिए जल्द ही योजनाओं के साथ आयोग, निगम, मंडल, प्राधिकरण, समिति और परिषदों के कामकाज की भी समीक्षा होगी।