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सरकार की सख्ती, अब बिजली कंपनी के अधिकारियों, कर्मचारियों को भी समय पर जमा करना होगा बिल, निर्देश जारी 

Written by:Atul Saxena
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एमडी ने कहा उपभोक्ताओं से विद्युत बिलों की बकाया राशि वसूली हेतु निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं, ऐसे में कंपनी के ही अधिकारी एवं कर्मचारियों पर विद्युत बिलों की राशि बकाया होना बिल्कुल भी उचित नहीं है।
सरकार की सख्ती, अब बिजली कंपनी के अधिकारियों, कर्मचारियों को भी समय पर जमा करना होगा बिल, निर्देश जारी 

MP News : मध्य प्रदेश में बिजली कंपनी के बकाया बिलों को लेकर कंपनी के अधिकारी उपभोक्ताओं पर सख्ती करते हैं, उनके घर वसूली दल जाते हैं, कई बार बड़े बकायादारों के नाम भी सार्वजानिक रूप से प्रदर्शित किये जाते हैं और बिजली बिल जमा नहीं करने पर कुर्की जैसी कड़ी कार्रवाई भी होती है, लेकिन अब सरकार बिजली कंपनी के अधिकारियों और कर्मचारियों को लेकर भी सख्त हो गई है।

आमतौर पर बिजली कंपनी के अधिकारी कर्मचारी बकाया बिलों की वसूली से बचे रह जाते हैं, लोग इसकी शिकायतें भी करते हैं लेकिन विभागीय मामला होने कारण कोई कड़ा एक्शन सामने नहीं आता लेकिन अब ऐसा संभव नहीं हो  पायेगा,अब सरकार ने इसपर सख्ती का मन बना लिया है।

बिजली कंपनी के निर्देश, बिल की राशि बकाया नहीं रहे      

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक क्षितिज सिंघल ने कहा है कि अब कंपनी के अधिकारी एवं कर्मचारियों को प्रतिमाह समय पर बिजली बिल भरना अनिवार्य है। पिछली समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि कंपनी के अंतर्गत कार्यरत सभी नियमित, संविदा अथवा बाह्य स्त्रोत अधिकारियों/कर्मचारियों पर विद्युत बिलों की कोई भी राशि बकाया नहीं रहे। इस संबंध में सभी वृत्त द्वारा कार्यवाही सुनिश्चित कर नोड्यूज प्रमाण-पत्र सात दिवस के भीतर प्रस्तुत करना अनिवार्य कर दिया है।

MD ने कहा, उपभोक्ता से वसूली का नियम स्टाफ पर भी लागू  

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी प्रबंध संचालक ने कहा है कि कंपनी द्वारा लगातार सभी श्रेणी एवं सभी वर्गों के उपभोक्ताओं से विद्युत बिलों की बकाया राशि वसूली हेतु निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं, ऐसे में कंपनी के ही अधिकारी एवं कर्मचारियों पर विद्युत बिलों की राशि बकाया होना बिल्कुल भी उचित नहीं है।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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