कमलनाथ

भोपाल

विधानसभा चुनाव में कर्जमाफी को आधार बनाकर सत्ता में आई कांग्रेस अब लोकसभा में भी इसे भुनाने की तैयारी कर रही है।सरकार द्वारा 15 जनवरी से किसानों के फार्म भरवाने की शुरुआत की जाएगी। वही 21 फरवरी को पात्र किसानों की संख्या के हिसाब से जिलों में फंड ट्रांसफर होगा और 22 फरवरी से खातों में पैसा जाना शुरू हो जाएगा।ऐसे में अगर आचार संहिता प्रभावी हो जाएगी तो  कर्जमाफी पर पेंच फंस सकता है। वही पूर्व वित्त मंत्री का भी मानना है कि आचार संहिता का फर्क पड़ सकता है।

दरअसल , बुधवार को मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सभी मंत्रियों से कहा कि कर्जमाफी के लिए 15 से 26 जनवरी के बीच किसानों के आवेदन भर जाएं। 15 जनवरी को खुद मुख्यमंत्री कमलनाथ भोपाल में किसानों के फार्म भरवाने की शुरूआत करेंगे। इस मौके पर कुछ किसानों से फार्म भी भरवाए जाएंगे।वही सभी मंत्री और विधायक अपने-अपने क्षेत्रों में कर्जमाफी योजना की शुरुआत करने को कहा गया है। मुख्यमंत्री का मत है कि लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए 22 फरवरी के बाद और आचार संहिता से पहले सभी 55 लाख किसानों तक लाभ पहुंच जाए। हालांकि सरकार ने सप्लीमेंट्री बजट में 5 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। इसके साथ ही किसानों को कर्जमुक्ति प्रमाण-पत्र और सम्मान देने का काम भी शुरू हो जाएगा।

वही सरकार द्वारा योजना को लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने के पहले पंचायत स्तर पर पहुंचाने की रणनीति बनाई गई है। इस काम में सरकारी तंत्र के साथ पार्टी भी जुटेगी।अगर सरकार 22  फरवरी तक ऐसा नही कर पाई तो आचार संहिता का पेंच फंस सकता है।चुंकी अप्रैल में लोकसभा चुनाव होना है, जिसके लिए फरवरी के अंतिम अथवा मार्च के पहले सप्ताह आचार संहिता प्रभावी हो सकती है। जिसके कारण कांग्रेस की योजना बीच में ही अटक सकती है।

पूर्व वितमंत्री ने भी माना आचार संहिता डाल सकती है असर

पूर्व वित्तमंत्री व भाजपा नेता जयंत मलैया ने कहा कि अभी 5 हजार करोड़ का ही प्रावधान कर्ज माफी के लिए किया गया है। कैसे सभी किसानों की कर्ज मुक्ति करेंगे, यह देखना होगा। आचार संहिता से पहले सरकार लेखानुदान लाएगी, लेकिन जो भी हो उसे आचार संहिता से पहले करना होगा। अभी की तैयारियों से ऐसा लगता है  सभी किसानों तक आचार संहिता से पहले यह लाभ नहीं पहुंच पाएगा।