इंग्लिश चैनल पार कर इतिहास रचने वाले सत्येंद्र अब पार करेंगे कैटलीना चैनल

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भोपाल| कहते हैं जोश, जज्बा और जुनून हो तो कोई भी काम नामुमकिन नहीं है। पैरा स्वीमर सत्येंद्र लोहिया पर यह बात सटीक बैठती है। इंग्लिश चैनल को पार करके इतिहास रचने वाले सत्येंद्र अब कैटलीना चैनल पार करने वाले है| इंग्लिश चैनल को पार कर यह कीर्तिमान रचने वाले वे मप्र के पहले तैराक और एशिया के पहले पैरा स्वीमर है। अब नई चुनौती के लिए सत्येंद्र तैयारी में जुट गए हैं, वहीं  अमेरिका की कैटलिन चैनल पार करने के लिए खर्च की राशि भी जुटा रहे हैं, क्यूंकि इसमें करीब आठ से दस लाख रुपए का खर्च होता है, इसके लिए वे अपने दोस्तों से संपर्क में है, वही उन्हें लोगों से भी मदद की उम्मीद है| 

सत्येंद्र बचपन से ही दिव्यांग हैं। जब वह 15 दिन के थे उन्होंने ग्लूकोज ड्रिप के रिएक्शन के चलते अपने पैर खो दिेए. बचपन से ही तैराकी का शौक था, लेकिन दिव्यांगता के चलते शुरुआती दौर में उन्हें खासी समस्याओं का सामना करना पड़ा।  सत्येंद्र ने दिव्यांगता को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया और गांव की ही बैसली नदी में तैराकी करने लगे। जिसके बाद तैराकी उनका पैशन बन गया और आज उसी तैराकी ने उन्हें यह मुकाम दिलाया। अब नई चुनौती के रूप में वे अगस्त में अमेरिका की कैटलिन चैनल पार करने वाले है| 20 मील यानी करीब 42 किलोमीटर लम्बी चैनल को पार करने के लिए वे तैयारी में जुटे हुए हैं| सत्येन्द्र इंग्लिश चैनल पार करने वाले एशिया के पहले दिव्यांग हैं। विक्रम अवॉर्डी सत्येन्द्र अब तक कई तैराकी स्पर्धाओं में 16 मैडल जीत चुके हैं। 2017 में पैरा स्वीमर सत्येन्द्र ने अरब सागर में 36 किलोमीटर तैरकर इतिहास रचा था। उन्होंने 5 घंटे 42 मिनट में इस दूरी को पार किया था। कलकत्ता में 2009 में सत्येन्द्र ने पहला मैडल हासिल किया था।वह भारत के पहले ऐसे दिव्यांग है जो 75 फीसदी प्रभावित होने के बाद भी 36 किमी की तैराकी कम समय में पूरी कर पाए।


मुश्किल चैलेंज है कैटलीना चैनल

सन् 2017 में इंग्लिश चैनल पार कर 32 वर्षीय सतेंद्र देश के पहले पैरास्विमर बन गए। सतेंद्र बताते हैं कि तैराकी के लिहाज से कैटलीना चैनल ज्यादा मुश्किल है| दिन में चलने वाली तेज हवाओं से बचने के लिए रात में तैराकी शुरू करना होती है| इसमें गहराई का अंदाजा नहीं लगता| आसमान और पानी भी एक दिखाई पड़ते हैं| इसलिए दिशा भ्रम भी होता है| इसका टेम्प्रेचर भी बदलता रहता है| केलिफोर्निया मेनलैंड के पास इसमें पांच डिग्री का अंतर आ जाता है| हायपोथर्मिया का खतरा रहता है| इसके अलावा सी सिकनेस. नोशिया, डिस्टन्स, और अचानक इसके पानी का बहाव भी बड़ी चुनौती है| इस तरह कि प्रत्योगिता में भाग लेने खर्चीला होता है| उन्होंने बताया कि इंग्लिश चैनल पार करने के लिए बमुश्किल पैसे जुटाए थे| आने जाने की टिकट का इंतजाम हो चुका है| इसमें करीब आठ से दस लाख रुपए की जरुरत होगी, मुझे लोगों की मदद की उम्मीद है|