MP Politics: SC में बुधवार को होगी फ्लोर टेस्ट पर सुनवाई, जिम्मेदारों को नोटिस

भोपाल/दिल्ली।सुप्रीम कोर्ट में अब फ्लोर टेस्ट को लेकर सुनवाई बुधवार सुबह 10:30 को होगी।इसके साथ ही सभी जिम्मेदारों को लेकर नोटिस जारी किया गया है और जवाब मांगा है।क्योंकि याचिका दायर करने के बाद कोई भी कोर्ट नही पहुंचा। ना बीजेपी की तरफ से कोई नेता पहुंचा और ना ही सरकार की तरफ से। जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़  ने याचिका पर सुनवाई की।पूरे मामले को कोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए सुनवाई कल 10:30 बजे रखी गई है।एक बार फिर सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिक गई है। हर किसी को कोर्ट के फैसले का इंतजार है।

शिवराज के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई ।कांग्रेस की तरफ से कोई भी उपस्थित नहीं हुआ ना तो वकील ना ही मुख्यमंत्री ना ही कोई सांसद ना ही कोई विधायक। सुप्रीम कोर्ट ने कल 10:30 बजे मध्य प्रदेश सरकार की तरफ से लोगों को उपस्थित होने का नोटिस जारी किया।इसमें विधानसभा अध्यक्ष और राज्यपाल सचिवालय को भी नोटिस जारी किया गया है। 24 घंटे में दोनों अपना पक्ष रखना है । कोरोना को ध्यान में रखने हुए विशेष व्यवस्था की गई है।सभी जिम्मेदार ईमेल व्हाट्सएप से नोटिस जारी कर अपना पक्ष रख सकते है। बुधवार यानी कल 10:30 बजे होगी सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट में बीजेपी की याचिका पर नोटिस दिया गया है। कांग्रेस की ओर से दूसरा पक्ष नहीं पहुंचा। फ्लोर टेस्ट पर कोई फैसला फिलहाल नहीं।अब कल दोनों पक्ष अपना मत कोर्ट के सामने रखेंगे।इसके बाद बडडा फैसला किया जाएगा।

 

दरअसल, मध्यप्रदेश के मौजूदा हालात को देखते हुए बीजेपी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाराज खटखटाया है।मध्यप्रदेश में तुरंत कमलनाथ सरकार के फ्लोर टेस्ट की मांग करने वाली पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान की अर्ज़ी पर मंगलवार सुबह 11 बजे सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और हेमंत गुप्ता की बेंच  के सामने मामले की सुनवाई होगी। लिस्ट में ये केस छठवें नंबर रखी गई है।

दऱअसल,पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अगुआई में भाजपा के दस विधायकों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कमलनाथ सरकार को 12 घंटे में बहुमत साबित करने का निर्देश देने की मांग की है। न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और हेमन्त गुप्ता की पीठ मामले पर सुनवाई करेगी। शिवराज के अलावा विधायक गोपाल भार्गव, नरोत्तम मिश्रा, भूपेंद्र सिंह, रामेश्वर शर्मा, विष्णु खत्री, विश्वास सारंग, संजय सत्येन्द्र पाठक, कृष्णा गौर और सुरेश राय की तरफ से याचिका दायर की गई है।

याचिका में आरोप लगाया है कि एमपी विधानसभा में बहुमत खो चुकी कांग्रेस की कमलनाथ सरकार फ्लोर टेस्ट को टालने की कोशिश कर रही है। इसके अलावा 2018 में हुए विधानसभा चुनाव से लेकर अब तक की सारी स्थिति बताई गई है। कहा गया है कि राज्य में बहुमत खो चुकी सरकार बहानेबाजी कर रही है। उसके कहने पर विधानसभा स्पीकर ने सत्र को 26 मार्च तक के लिए टाल दिया है। सुप्रीम कोर्ट के कई पुराने फैसलों का भी हवाला याचिका में दिया गया है।

इस याचिका में कहा गया है कि 1994 में एस आर बोम्मई मामले के फैसले में सुप्रीम कोर्ट यह साफ कर चुका है कि सरकार का शक्ति परीक्षण विधानसभा के पटल पर होना जरूरी है। बाद में नबाम रेबिया, रामेश्वर प्रसाद, जगदंबिका पाल जैसे मामलों के फैसले में भी यही व्यवस्था दोहराई गई। पिछले 2 सालों में सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक और महाराष्ट्र में सरकार को 24 घंटे के भीतर विधानसभा में बहुमत साबित करने का आदेश दिया था। इस मामले में भी ऐसा ही होना चाहिए।प्रदेश में चल रही सियासी उठापटक के बीच अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिक गई है।

 

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