MP Politics dissension: विधायक केपी सिंह की नरोत्तम से मुलाकात, कांग्रेस में हड़कंप

भोपाल।
उपचुनाव (BY Election) से पहले भले ही कांग्रेस (Congress) एकजुटता का दावा कर रही है, लेकिन हकीकत इससे कोसो दूर है।अब भी कांग्रेस में आपसी फूट और अंतर्कहर हावी है, यही कारण है कि रविवार को विधायक दल की बैठक में 90 में से 70 के करीब विधायक पहुंचे। कांग्रेस विधायक दल की बैठक (Congress Legislature Group Meeting) के 50 विधायकों ने शपथ ले ली कि अब कोई भी पार्टी से नहीं टूटेगा और सरकार को वापसी के लिए कार्य में लगेंगे। लेकिन इस शपथ को चौबीस घंटे भी नही बीते कि आज सोमवार सुबह पिछोर से कांग्रेस विधायक केपी सिंह (Congress MLA from Pichor KP Singh) गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा (Home Minister Narottam Mishra) से मिलने पहुंच गए। दोनों के बीच बंद कमरे में लंबी चर्चा हुई।

रात के बाद सुबह हुए इस घटनाक्रम से कांग्रेस में हड़कंप मच गया है। बैठक के बाद केपी सिंह के यूं नरोत्तम से मिलने पर सियासी गलियारों में कई मायने निकाले जा रहे है।हालांकि यह पहला मौका नही है जब केपी सिंह ने बीजेपी नेताओं से संपर्क किया हो, इसके पहले भी मंत्री ना बनाए जाने पर केपी ने बगावती तेवर दिखाए थे।यहां तक की केपी खुले मंच से कई बार नरोत्तम की तारीफ भी कर चुके है। एक तरफ कांग्रेस विधायक दल की बैठक में विधायकों का एकजुट होने का दावा करना और दूसरी तरफ यूं बीजेपी के संपर्क में आना कई सवाल खड़े कर रहा है।हालांकि सियासी हलको में इस बात की चर्चा है कि अभी 4-5 विधायक और कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हो सकते है।हाल ही में दो विधायक प्रदुम्नन सिंह लोधी और सुमित्रा देवी ने कांग्रेस का दामन छोड़ बीजेपी ज्वाइन की थी।

वही कांग्रेस की बैठक में 20 से ज्यादा विधायक नदारद रहे थे, जिसमें स्वास्थ्य कारणों के चलते प्रवीण पाठक, लखन घनघोरिया और रामलाल सहारे उपस्थित नहीं थे। वहीं आरिफ अकील और लक्ष्मण सिंह की तरह कई अन्य विधायकों का भी बैठक में ना पहुंचना चर्चा का विषय बना रहा।खास बात ये है कि बैठक में फैसला लिया गया था कि कांग्रेस पार्टी बीजेपी सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन करेगी। बीजेपी में शामिल होने वाले पूर्व विधायकों के खिलाफ दे कांग्रेस सीधा मोर्चा खोलेगी। इसके साथ ही ऐसे विधायकों को जनता के सामने एक्सपोज़ किया जाएगा। यहां तक की पीसीसी चीफ कमलनाथ ने कहा था कि अगली बैठक राजभवन में शपथ के बाद होगी। जिस पर नरोत्तम ने कहा कि जब कमलनाथ सीएम थे, तब भी पूरे विधायक बैठकों में नहीं पहुंच पाते थे। कांग्रेस में कॉन्फिडेंस नहीं, केवल जाहिर कर रहे हैं ताकि बाकी और लोग न निकल जाएं। कमलनाथ जी पर कांग्रेस के विधायकों का कभी भरोसा नहीं रहा, जब वो मुख्यमंत्री थे तब भी नहीं और अब भी नहीं। उनकी पार्टी टूट रही है तो शपथ की बात इसलिए कह रहे हैं ताकि विधायक भ्रम में रहें, लेकिन अब कोई भ्रम में रहने को तैयार नहीं।

बता दे कि मध्यप्रदेश में अब 26 विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव होने हैं। हालांकि अभी तक उपचुनाव की तारीखों को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।लेकिन चुनाव आयोग ने अपने जारी निर्देश में साफ कह दिया है कि 2020 में ही उपचुनाव होंगे, ऐसे में अगर कांग्रेस के और विधायक टूटते है तो बड़ा नुकसान हो सकता है वही बीजेपी मजबूत हो सकती है।